home page

मध्य प्रदेश में गुजरात की तर्ज पर बनेगी गिफ्ट सिटी, उज्जैन में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

 | 
मध्य प्रदेश में गुजरात की तर्ज पर बनेगी गिफ्ट सिटी, उज्जैन में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस


- मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा

भोपाल, 18 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुजरात की तर्ज पर मध्य प्रदेश (राजधानी क्षेत्र भोपाल) में भी गिफ्ट सिटी बनाई जाएगी। उज्जैन में मेडी सिटी, साइंस सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज बन रहे हैं। उज्जैन में ही मेडिकल, साइंस और टेक्निकल एजुकेशन के एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की भी स्थापना की जाएगी।

मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार देर शाम अपने निवास कार्यालय समत्व भवन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्यों एवं अन्य गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भोपाल में गिफ्ट सिटी बनाने के ठोस प्रयास करें। उज्जैन में सीओई की स्थापना की के लिए केंद्र सरकार से भी समन्वय किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी भविष्य में अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। मध्य प्रदेश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएँ हैं। हमें नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देकर प्रदेश को ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का सशक्त केंद्र बनाना होगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए समन्वित और प्रभावी प्रयास किए जाएं। निवेश परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए निवेश संवर्धन पर विशेष बल दिया। उन्होंने विभाग द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रमुख निवेश (लीड इन्वेस्टमेंट) आकर्षित करने के लिए तैयार की गई विशेष कार्य योजना की समीक्षा की तथा इसे समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में होने वाला निवेश न केवल औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन, अनुसंधान, स्टार्ट-अप संस्कृति और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता देने तथा निवेशकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए।

बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं, प्रगति रिपोर्ट तथा आगामी कार्य योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं को साकार करने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में जरूरी मानव संसाधन की पद पूर्ति कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को और भी सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने प्रेजेंटेशन देकर बताया कि उज्जैन में डीपटेक रिसर्च पार्क की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। अब इसी प्रस्ताव अंतर्गत उज्जैन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए नई कार्य योजना तैयार कर संशोधित प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह सेंटर करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। डीपटेक रिसर्च पार्क भी अब इसी सेंटर ऑॅफ एक्सीलेंस का हिस्सा होगा।

उन्होंने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा भोपाल में गिफ्ट सिटी बनाने की तैयारी है। इसे ईकाई सिटी (EKAI CITY - एजुकेशन, नॉलेज एण्ड एआई सिटी) के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा करीब 10 हजार करोड़ रुपये की फंडिंग की जाएगी। राज्य सरकार भी इसमें राशि मिलाएगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका की चार यूनिवर्सिटीस मध्य प्रदेश में अपना अध्ययन परिसर (स्टडी कैम्पस) खोलना चाहती हैं। उनसे भी समन्वय किया जा रहा है।

मप्र उभरता हुआ टेक सेक्टर

प्रमुख सचिव एम. सेलवेंद्रम ने बताया कि मध्य प्रदेश देश का एक उभरता हुआ टेक हब बन रहा है। यहां पांच आईटी एसईजेड, 15 से अधिक आईटी पार्क, 50 से अधिक बड़ी आईटी कंपनियां, करीब 1200 से अधिक टेक स्टार्ट-अप्स कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले 300 से अधिक कॉलेज, 50 हजार से अधिक तकनीकी स्नातक/वर्ष (यूजी. पीजी, डिप्लोमा), आईआईटी, आईआईआईटीडीएम, आईआईएम, एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान भी हैं।

12,500 करोड़ रुपये का निवेश आया, 50 हज़ार नए रोजगार सृजित

उन्होंने बताया कि प्रदेश में तकनीकी क्षेत्र की 6 नीतियां हैं। एमपी स्टार्ट-अप पॉलिसी : 2022 भी लागू है। सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय, ब्याज सब्सिड़ी जैसे प्रोत्साहन भी निवेशकों को दिए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में टेक सेक्टर में लगभग 12 हजार 500 करोड़ रुपये का निवेश आया है। इससे करीब 50 हजार नए रोजगार का सृजन हुआ है। विभाग द्वारा आईटी आईटीईएस तथा क्वांटम और एआई जैसी उभरते तकनीकी सेक्टर, डेटा सेंटर, ईएसडीएम- डेटा सेंटर कम्पोनेंट्स मैन्यूफेक्चरिंग, सेमी कंडक्टर- पैकेजिंग, डिजाइन, ड्रोन निर्माण, जीसीसी, एवीजीसी- एक्सआर एवं स्पेस टेक पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में इस पूरे सेक्टर के अंतर्गत करीब 5 हजार 892 करोड़ रूपए की मेगा परियोजनाओं के प्रस्ताव पाइपलाइन में है।

प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बैठक में बताया कि उद्योग विभाग के पास 10 लाख वर्ग फीट जमीन उपलब्ध है। निवेशकों को कम से कम समय में भूमि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अधीन स्टार्ट-अप मिशन के तहत हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों को भी जरूरी मदद मुहैया करा रहे हैं।

प्रो. संतोष कुमार विश्वकर्मा ने अपने स्पेशल प्रेजेंटशन में मध्य प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आमूल-चूल विकास और इस सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सरकार को इस सेक्टर को प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर