देश में सबसे पहले महाकाल के आंगन में शुरू होगा दीपोत्सव, दिपावली पर गर्भग्रह में फुलझड़ी जलाएंगे पुजारी
उज्जैन, 05 नवंबर (हि.स.)। देशभर में दीपावली की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। परंपरानुसार देश में सबसे पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के आंगन में पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। शुक्रवार, 06 नवंबर को तड़के धनतेरस के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजन होगा।
ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल को केवल आराध्य देव नहीं, बल्कि अवंतिका का राजा माना जाता है। यही वजह है कि मान्यता के अनुसार प्रजा से पहले राजा के दरबार में त्योहार मनाया जाता है। इस बार भी सदियों से चली आ रही इस परंपरा के तहत महाकाल के आंगन से दीपोत्सव का शुभारंभ होगा।
पुरोहित समिति के सदस्य लोकेश व्यास ने गुरुवार को बताया कि शुक्रवार को धनतेरस के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में परंपरानुसार विशेष पूजन किया जाएगा। पुजारी-पुरोहित भगवान महाकाल के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का पूजन-अभिषेक करेंगे। बाबा महाकाल को चांदी का सिक्का भी अर्पित किया जाएगा। इस दौरान सुबह भस्म आरती में विशेष पूजन होगा। पंडे-पुजारी गर्भगृह में फुलझड़ी जलाकर दीपावली पर्व की शुरुआत करेंगे।
उन्होंने बताया कि बताया कि पूजन में उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित करीब दो दर्जन पंडे-पुजारी शामिल होंगे। इसी दिन सुबह करीब नौ बजे नंदीहाल में पुरोहित समिति की ओर से गणपति और महालक्ष्मी पूजन के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत और रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस पूजन में सुख-समृद्धि, आरोग्य और विश्व कल्याण की कामना की जाएगी।
महाकाल मंदिर की दीपावली दूसरे मंदिरों से कई मायनों में अलग होती है। यहां दीपावली सिर्फ दीप जलाने और आतिशबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान को परिवार के सदस्य और नगर के राजा के रूप में मानकर उनकी दिनचर्या में उत्सव को शामिल किया जाता है। धनतेरस से लेकर दीपावली तक विशेष पूजन, अभिषेक, शृंगार और भोग की परंपराएं निभाई जाती हैं।
महाकाल मंदिर की मान्यता है कि उज्जैन के राजा भगवान महाकाल हैं। इसी परंपरा के चलते यहां हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहार नगरवासियों से पहले मंदिर में मनाए जाते हैं। पुजारी परंपरा के अनुसार राजा के दरबार में उत्सव मनाने के बाद ही नगर में त्योहार की खुशियां शुरू होती हैं। यही वजह है कि महाकाल की नगरी में दीपावली का धार्मिक महत्व और भी विशेष हो जाता है।
महाकाल मंदिर की दीपावली में सबसे अनूठी परंपरा भगवान के अभ्यंग स्नान और उबटन की है। मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि आठ नवंबर को विशेष पूजन के दौरान पुजारी परिवार की महिलाएं बाबा महाकाल को केसर और चंदन का उबटन लगाएंगी। इससे पहले तिल्ली के तेल से अभ्यंग स्नान कराया जाएगा। इसके बाद गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराकर भगवान का विशेष शृंगार किया जाएगा। इस परंपरा की खास बात यह है कि पुजारी परिवार की महिलाएं वर्ष में विशेष अवसर पर ही भगवान के इस अभिषेक और उबटन की सेवा करती हैं। स्नान के बाद बाबा को सोने-चांदी के आभूषणों और नए वस्त्रों से सजाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दीपावली पर भगवान महाकाल को अन्नकूट का महाभोग लगाया जाएगा। इसमें गुजिया, पपड़ी, खुरमे, खीर, पूड़ी, भजिया, चावल, दाल, सब्जियां और विभिन्न प्रकार की चटनियां शामिल होंगी। अलग-अलग पारंपरिक व्यंजनों से बाबा का भोग सजाया जाएगा।
पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, महाकाल की दीपावली का सबसे आकर्षक दृश्य पांचों आरतियों के दौरान दिखाई देगा। सुबह की भस्म आरती से लेकर रात की शयन आरती तक फुलझड़ियों से बाबा की आरती की जाएगी। दीपों और फुलझड़ियों की रोशनी से गर्भगृह और मंदिर परिसर में दीपोत्सव का नजारा दिखाई देगा। शाम को कोटितीर्थ कुंड पर दीपमालाएं सजाई जाएंगी।
इस वर्ष 8 नवंबर को चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन पड़ रही हैं। इसी कारण महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान दीपावली का विशेष आयोजन होगा, जबकि नगरवासी शाम को अपने घरों में दीप जलाकर पर्व मनाएंगे। तिथियों का यह संयोग मंदिर की पारंपरिक पूजा व्यवस्था को इस बार और खास बना रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

