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मप्र के ऐतिहासिक भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा और जुमे की नमाज पुलिस के लिए चुनौती

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मप्र के ऐतिहासिक भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा और जुमे की नमाज पुलिस के लिए चुनौती


- हाई अलर्ट पर प्रशासन, सुरक्षा के लिए 8 हजार से ज्यादा जवान तैनात, ड्रोन से होगी निगरानीधार, 19 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में इस बार बसंत पंचमी पर पूजा और जुमे की नमाज पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पूर्व अनुभवों को देखते हुए जिला प्रशान प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए बाहरी बलों समेत सुरक्षा के कडे़ इंतजाम किए हैं।

इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार (23 जनवरी) को पड़ रही है। इससे पहले बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने का संयोग 2006, 2013 और 2016 में बना था, तब क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात देखने को मिले थे। तीनों मौकों पर पथराव और आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसके चलते कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी थी। इन्हीं अनुभवों के कारण इस बार प्रशासन किसी भी तरह की चूक नहीं चाहता और पहले से ही अलर्ट मोड में है और भारी संख्या में भोजशाला में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर ने सोमवार को बताया कि बसंत पंचमी का त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए पुलिस-प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। इलाके की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए रविवार को करीब 2000 जवानों ने फ्लैग मार्च किया। पूरे क्षेत्र में 1000 सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन से निगरानी की जा रही है। जिले में कुल 2435 पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके। इसके अलावा सीआरपीएफ के 8000 जवान भी सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए मौजूद रहेंगे।

उन्होंने बताया कि फिलहाल 25 से 30 प्रतिशत पुलिस बल धार में तैनात किया जा चुका है। वर्तमान में 1500 से 2000 पुलिस जवान फ्लैग मार्च में शामिल हुए हैं, जबकि 20 जनवरी तक जिले में 7 हजार से 8 हजार अतिरिक्त पुलिस बल और पहुंच जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह तैयार है और जिले में शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए पूरे भोजशाला परिसर को 6 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। एक ओर मुस्लिम पक्ष ने नमाज के लिए सुरक्षा की मांग की है, वहीं दूसरी ओर हिंदू पक्ष ने अखंड पूजन का संकल्प लिया है। प्रशासन ने भोजशाला परिसर में पुलिस चौकी और कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है।

भोज उत्सव समिति के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड हवन-पूजन किया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया है कि पूजन कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के संपन्न कराया जाएगा वहीं शुक्रवार होने के कारण उसी दिन दोपहर एक बजे से भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय जुमे की नमाज अदा करेगा। दोनों समुदायों के धार्मिक कार्यक्रम एक ही दिन होने से प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।

इधर, कमाल मौलाना मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी के सदर जुल्फिकार पठान ने कहा है कि मुस्लिम समाज की ओर से शहर की शांति बनाए रखने में पूरा सहयोग किया जाएगा। महाराजा भोज स्मृति बसंतोत्सव समिति के सुरेश जलोदिया ने बताया कि भोज समिति और समूचे हिंदू समाज की ओर से बसंत पंचमी के अवसर पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा करने का निर्णय लिया गया है।

भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति का मामला उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है। हिंदू फ्रेंड फॉर जस्टिस नामक संगठन की ओर से अपील की गई है कि बसंत पंचमी पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के आदेश के आधार पर दिनभर पूजा की अनुमति दी जाए। संगठन की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा दायर की गई यचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है।

दरअसल, भोजशाला को लेकर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 7 अप्रैल 2003 को जो आदेश दिया था, उसमें हिंदू समाज को बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति दी थी, लेकिन बसंत पंचमी पर शुक्रवार होने की स्थिति में इस आदेश में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इसीलिए बसंत पंचमी पर जुम्मा होने के कारण यहां विवाद की स्थिति बनने की आशंका रहती है। इस स्थिति के चलते इस मामले से जुड़ी याचिका की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने भोजशाला के पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश दिए थे।

इसके बाद यहां किए गए सर्वे की 2000 पेज वाली रिपोर्ट में आर्कियोलॉजिकल सर्वे में स्पष्ट किया गया है कि भोजशाला परिसर से विभिन्न धातुओं के सिक्के प्राप्त हुए हैं, जो दसवीं से 16वीं शताब्दी के बीच के हैं। इसके अलावा यहां 94 मूर्तियों के टुकड़े मिले जो मूर्तियां गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह और भैरव की है. वहीं पशु-पक्षियों की प्रतिकृतियों के अवशेष भी मिले हैं। हालांकि इसके स्वामित्व पर फैसला कोर्ट में ही लंबित है।

गौरतलब है कि धार में पुरातात्विक इमारत को हिंदू समाज माता सरस्वती वाग्देवी का मंदिर मानकर यहां बसंत पंचमी पर पूजा अर्चना करता है वहीं मुस्लिम समाज इसी स्थान को मौलाना कमाल अहमद की दरगाह मानता रहा है। साल 1935 में धार रियासत के दीवान ने भोजशाला में मुस्लिम समाज को शुक्रवार के दिन नमाज की अनुमति दी थी। इसके बाद से भोजशाला को लेकर दो पक्षों के बीच स्वामित्व का विवाद चल रहा है। यहां प्रति मंगलवार को हिन्दू समाज को पूजा और प्रति शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति है। इसके साथ बसंत पंचमी के मौके पर हिंदू समाज यहां वर्षों से पूजा-अर्चना करता आ रहा है, लेकिन शुक्रवार को बसंत पंचमी पड़ने पर पुलिस-प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इस बार किसी तरह की परेशानी न हो, इसे लेकर प्रशासन दोनों पक्षों से लगातार बातचीत कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर