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मप्र के इंदौर में उत्सव के रूप में मनाई गई देवी अहिल्या की 231 वीं पुण्यतिथि, निकली भव्य पालकी

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मप्र के इंदौर में उत्सव के रूप में मनाई गई देवी अहिल्या की 231 वीं पुण्यतिथि, निकली भव्य पालकी


मप्र के इंदौर में उत्सव के रूप में मनाई गई देवी अहिल्या की 231 वीं पुण्यतिथि, निकली भव्य पालकी


- कई समाजों की झांकियां बनीं आकर्षण, 51 बटुक,अखाड़े, घड़सवार महिलाएं हुईं शामिल

इंदौर, 10 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में गुरुवार को लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 231वीं पुण्यतिथि उत्सव के रूप में मनाई गई। इस मौके पर गांधी हॉल से राजवाड़ा तक देवी अहिल्याबाई की भव्य पालकी निकाली गई। शहरवासियों ने पालकी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

देवी अहिल्या बाई की पालकी की शुरुआत गुरुवार शाम को पूरे विधि विधान के साथ गांधी हाल से शुरुआत हुई, जहां पुलिस बैंड ने इस पालकी यात्रा की अगवानी की। वहीं बग्घी पर सवार हाथों में शिवलिंग लिए माता अहिल्या बाई का रूप लिए युवती में माता अहिल्या बाई की ही छवि दिखाई दी, जो कि आकर्षण का केंद्र रही। यात्रा में बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए। ढोल-ताशों, भजन मंडलियों, झांकियों और अखाड़ों ने माहौल को उत्साह से भर दिया है।

यात्रा में मंत्री तुलसीराम सिलावट सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्का सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पालकी यात्रा का इंदौर शहर के प्रमुख मार्ग पर कई मंचों से स्वागत हुआ। यात्रा में शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता भी दी। मराठी समाज के साथ विभिन्न समाजों की झांकियां शामिल रही। वहीं अखाड़ों के प्रदर्शन, युवतियों का अखाड़ा, 51 बटुक, अहिल्या सेना और दुर्गा वाहिनी के शस्त्र प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र बना। यात्रा में होलकर राजाओं के प्रतिरूप भी शामिल रहे।

गांधी हॉल से राजबाड़ा होते हुए गोपाल मंदिर तक पहुंची

पालकी यात्रा गांधी हॉल से शुरू होकर कोठारी मार्केट, तोपखाना, श्रीकृष्ण टॉकीज, वीर सावरकर मार्केट, माता लक्ष्मी मंदिर और राजबाड़ा होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। यहीं यात्रा का समापन हुआ। यात्रा में झंडासिंह व्यायामशाला और मल्हारी मार्तंड व्यायामशाला के अखाड़े भी शामिल रहे। आयोजकों के अनुसार ये दोनों अखाड़े वर्ष में केवल अहिल्या पालकी यात्रा के दौरान निकलते हैं।

इससे पहले अहिल्या उत्सव के तहत गुरुवार को राजबाड़ा स्थित अहिल्या उद्यान में लोकमाता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद सामूहिक अहिल्या स्तुति हुई। सुबह 9 बजे गोपाल मंदिर में शाम की पालकी में विराजित की जाने वाली देवी प्रतिमा का पूजन किया गया। वहीं 9.30 बजे पंढरीनाथ स्थित इंद्रेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक हुआ। गांधी हॉल में दोपहर 3.30 बजे गुणीजन सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद शाम को पालकी यात्रा निकली। यह अहिल्या उत्सव का 111वां वर्ष है।

कई समाजों की झांकियां बनीं आकर्षण

आयोजन में मराठी समाज के साथ शहर के विभिन्न समाजों की भागीदारी देखने को मिली। अलग-अलग समाजों की झांकियों के जरिए उनकी परंपरा और संस्कृति दिखाई गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी पालकी यात्रा के मार्ग पर मौजूद रहे।

इस मौके पर विद्वत धर्मसभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धनंजय शास्त्री वैद्य ने कहा कि नाम लेने से पुण्य की प्राप्ति होती है, वे ही पुण्यश्लोका कहलाती हैं। समर्थ गुरु रामदास ने कहा कि जो देश का, धर्म का, राष्ट्र का कार्य मनोभाव से करते हैं, वे साक्षात् देव अवतार होते हैं।

शास्त्री ने आगे कहा कि देवी अहिल्या बाई ने ही सर्वप्रथम महिलाओं की शिक्षा के बारे में सोचा था और अपने राज्य की महिलाओं की शिक्षा के लिए, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और संस्कारित करने के लिए योगदान दिया। सिर्फ इंदौर ही नहीं, पूरे देश में उनकी यशोगाथा गाई जाती है। देशभर में बनाए गए मंदिर, घाट और धर्मशालाएं उनकी कीर्ति आज भी गा रही हैं।

समारोह के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल थे। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्या की नेतृत्व क्षमता और दक्षता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके कार्य और नेतृत्व को याद करते हुए हम उनकी जयंती और पुण्यतिथि उत्सव के रूप में मनाते हैं। समारोह में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर गुणीजन सम्मान से ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रसिद्ध शिक्षक हेमचंद्र जोशी को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे समर्पित शिक्षकों की आज बहुत जरूरत है। अहिल्या उत्सव के दौरान विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर