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मप्र के मुख्यमंत्री ने गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ी मादा चीता, राधा अष्टमी पर नाम दिया राधा

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मप्र के मुख्यमंत्री ने गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ी मादा चीता, राधा अष्टमी पर नाम दिया राधा


मप्र के मुख्यमंत्री ने गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ी मादा चीता, राधा अष्टमी पर नाम दिया राधा


- गांधी सागर में हुए चार चीते, अभयारण्य बना देश का दूसरा बड़ा चीता घर

भोपाल, 20 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाई गई मादा चीता सीसीबी2 को नीमच-मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्य अभयारण्य के सॉफ्ट-रिलीज बाड़े में छोड़ा। इस अवसर पर उन्होंने राधा अष्टमी के उपलक्ष्य में मादा चीता का नामकरण राधा किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि चीता प्रोजेक्ट सफलता के नये मानदण्ड स्थापित कर रहा है। वहीं मध्य प्रदेश में विलुप्त हो चुके वन जीवों को पुनर्स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। गत वर्ष छोड़े गये चीतें पूरी तरह स्वस्थ हैं।

उन्होंने कहा कि गांधी सागर अभयारण्य में एक और चीते का छोड़ा जाना मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मादा चीता राधा के गांधी सागर पहुंचने के बाद यहां चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। अभयारण्य में पहले से दो नर चीते प्रभास और पावक तथा एक मादा चीता धीरा मौजूद हैं। अब गांधी सागर में दो नर और दो मादा यानी कुल चार चीते हो गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है, प्रदेश में चीतों की बढ़ती हुई संख्या इसका प्रमाण है। हमारा सौभाग्य है कि मध्य प्रदेश वन्यजीवों की विविधता से भरपूर है। हमारा प्रदेश चीता स्टेट के साथ टाइगर स्टेट, घड़ियाल स्टेट और गिद्ध स्टेट के रूप में भी जाना जाने लगा है। असम से जंगली भैंसे भी लाएं गए हैं और प्रदेश में गजराज की संख्या भी लगभग 100 हो गई है। गांधी सागर अभयारण्य में छोड़े गए चीतों से वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय नागरिकों के लिये रोजगार एवं आजीविका के लिये नये अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने बताया कि गांधी सागर अभयारण्य में चीता संरक्षण का दायरा और बढ़ाया गया है, मादा चीता राधा को गांधी सागर में बसाया जाना मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता को कूनो से आगे विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गांधी सागर को चीतों के लिए दूसरे प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां चीतों के स्वास्थ्य, व्यवहार और नये वातावरण में उनके अनुकूलन की लगातार निगरानी वन विभाग की टीम द्वारा की जाएगी। नई मादा चीता के आने से गांधी सागर में चीतों के संरक्षण और भविष्य में चीता प्रजनन की संभावनाओं को और भी तेजी से बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग द्वारा प्रकाशित सेकंड होम ऑफ चीता गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी बुकलेट का भी विमोचन किया। चीता पुनर्स्थापना के चार वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित इस कार्यक्रम में विधायक चन्दर सिंह सिसोदिया व अनिरुद्ध माधव मारू और मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव डॉ. समिता राजौरा भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रदेश का चीता प्रोजेक्ट एशिया का पहला प्रोजेक्ट है। एशिया से चीते गायब हो गए थे, प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से राज्य सरकार ने संकल्प लिया और चीतों के पुनर्वास का अभियान शुरू किया। प्रदेश में चीतों की संख्या अब लगातार बढ़ती जा रही है। जहां सैकड़ों साल पहले चीतें विलुप्त हो गए थे, वहीं अब वे स्थानीय वातावरण में खेलते-कूदते दिखाई दे रहे हैं। यह वन्य जीवों के प्रति जीयों और जीने दो के सिद्धांत के आधार पर प्राप्त उपलब्धि का प्रतीक है। हमारे जंगल आबाद हो रहे हैं यह हम सब के लिए सौभाग्य का विषय है।

गौरतलब है कि प्रोजेक्ट चीता'' के तहत चीता सीसीबी2 को बोत्सवाना के घांजी से 28 फरवरी 2026 को भारत लाया गया था। उसे यहां श्योपुर के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था। रविवार को उसे कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे गांधी सागर के सॉफ्ट-रिलीज बाड़े में छोड़ा। अब गांधी सागर अभ्यारण्य में कुल चार चीते हो गए हैं। इसे कूनों के बाद भारत में चीतों के दूसरे आवास के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर