मप्र के बालाघाट पहुंचे अभिजीत दीपके, आदिवासी बच्चों की मौत के लिए सरकार को बताया जिम्मेदार
- बालाघाट में 30 बच्चों की हो चुकी है मौत, पीड़ित परिवारों से मिले दीपके, आंदोलन की दी चेतावनी
बालाघाट/भोपाल, 12 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में 30 बच्चों की मौत का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से गरमा गया है। शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके बालाघाट पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बच्चों की मौत के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बताया।
दीपके ने कहा कि आदिवासी बच्चे जिस तरह से लगातार बीमार हो रहे हैं, उससे साफ है कि उनकी बहुत अनदेखी हुई है। उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। टीकाकरण और पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है, इसके कारण वे झीरिया का पानी पीने को मजबूर हैं। हम यहां बड़ा आंदोलन करेंगे।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों की इस हालत के लिए आदिवासी विकास मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और सचिव जिम्मेदार हैं। सीजेपी आदिवासियों की इस लड़ाई में उनका पूरा साथ देगा। हमने जनप्रतिनिधियों को हेलीकॉप्टर में उड़ने या आलीशान भवन बनाने के लिए नहीं चुना है।
बालाघाट जिले के दौरान पर पहुंचे अभिजीत दीपके ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों का दौरा किया और बच्चों को खोने वाले परिवारों के साथ ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने स्थानीय लोगों से बच्चों की मौत और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली। दीपके ने आरोप लगाया कि गांवों में शुद्ध पेयजल, पोषण और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उनका कहना है कि इन व्यवस्थाओं की कमी का खामियाजा आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
दीपके ने राज्य सरकार और प्रशासन से मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिन अधिकारियों या प्रशासनिक व्यक्तियों की लापरवाही सामने आती है, उन्हें पद से हटाकर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में उनकी पार्टी की ओर से बालाघाट में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
बालाघाट दौरे के दौरान अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि मृतकों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़े 36 से कहीं ज्यादा हो सकती है। उन्होंने पोस्ट में दावा किया कि आदिवासियों के विरोध-प्रदर्शन के बाद हाल ही में 86 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बच्चों का अंतिम संस्कार बिना पोस्टमार्टम के किया जा रहा है और कुछ मामलों में माता-पिता की गैर-मौजूदगी में भी अंतिम संस्कार किए जाने की बात सामने आई है।
राहुल गांधी भी उठा चुके हैं मामला
कुछ दिन पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को बेहद दुखद बताया था। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से व्यक्तिगत रूप से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। सरकार की ओर से मामले में आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। हालांकि, विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों की ओर से सरकारी आंकड़ों और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

