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नेपाल की जल त्रासदी पर मोरारी बापू ने जताया शोक,राहत के लिए 51 लाख रुपये की सहायता की घोषणा

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नेपाल की जल त्रासदी पर मोरारी बापू ने जताया शोक,राहत के लिए 51 लाख रुपये की सहायता की घोषणा


- पीएम फंड में 11 लाख और नेपाल प्रधानमंत्री राहत कोष में 40 लाख रुपये दिए जाएंगे

अहमदाबाद, 28 अगस्त (हि.स.)। नेपाल में हाल ही में आई भीषण जल त्रासदी से कथाकार मोरारी बापू व्यथित हैं। उन्होंने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए 51 लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की है।

मोरारी बापू ने नेपाल में आई भयावह प्राकृतिक आपदा पर दुख जताते हुए हनुमंत प्रसाद के रूप में 51 लाख रुपये की सहायता अर्पित करने का निर्णय लिया है। इसमें से 11 लाख रुपये चित्रकूट धाम तलगाजरडा के माध्यम से भारतीय प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए जाएंगे, जबकि 40 लाख रुपये नेपाल के प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराए जाएंगे।

बताया गया है कि इस सहायता राशि की वित्तीय सेवा मुंबई स्थित रामकथा के एक श्रोता द्वारा की जाएगी। इस पहल के जरिए नेपाल में आपदा से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़े होने का संदेश दिया गया है।

मोरारी बापू ने भारत समेत विश्व के विभिन्न देशों के नागरिकों के लिए हनुमानजी के चरणों में प्रार्थना की। उन्होंने जल त्रासदी में जान गंवाने वाले सभी लोगों की आत्मा की शांति तथा उनके परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

मोरारी बापू ने आपदा प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में मानवता और करुणा सबसे महत्वपूर्ण है। सहायता राशि की घोषणा के माध्यम से उन्होंने प्रभावित लोगों के प्रति सहयोग और संवेदना का संदेश दिया है।

उल्लेखनीय है कि बुधवार सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर का करीब 1.2 किलोमीटर लंबा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया। इसके बाद बर्फ, चट्टानों और मलबे के साथ बड़ी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगा। कुछ ही समय में इसका असर भोटेकोशी नदी पर दिखाई दिया और नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई।

इस प्राकृतिक आपदा के बाद कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है तथा बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की खबर सामने आई है। ऐसे समय में मोरारी बापू की ओर से घोषित आर्थिक सहायता को आपदा प्रभावित परिवारों की मदद के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे