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छत्तीसगढ़ में पिछले साल 982 बच्चे लापता ,582 बरामद

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छत्तीसगढ़ में पिछले साल 982 बच्चे लापता ,582 बरामद


रायपुर, 09 मार्च (हि.स.)। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की 'मिसिंग चिल्ड्रन' रिपोर्ट के अनुसार, 01 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच छत्तीसगढ़ से 982 बच्चे लापता हुए। इनमें से 582 को बरामद कर लिया गया है, जबकि 400 अभी भी लापता हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ देश में छठे स्थान पर है, जहां 14 से 17 वर्ष की लड़कियां सबसे अधिक प्रभावित हैं।

आठ मार्च 2026 को जारी 'मिसिंग चिल्ड्रन' रिपोर्ट के अनुसार, इन आंकड़ों के साथ छत्तीसगढ़ देश में लापता बच्चों के मामलों में छठे स्थान पर है। पिछले पांच वर्षों से राज्य लगातार टॉप-10 राज्यों में बना हुआ है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग के किशोर सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस आयु वर्ग में लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव तस्करी, बाल श्रम, पारिवारिक विवाद या घर से भागने जैसी कई वजहें बच्चों के लापता होने के पीछे हो सकती हैं।

छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुसार, आपरेशन मुस्कान अभियान के तहत विशेष सफलता हासिल की गई है ।राज्य पुलिस की टीमें बच्चों की खोज में 18 से अधिक राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना, यूपी, और दिल्ली) तक पहुंची ।अकेले जांजगीर-चांपा जिले से सबसे अधिक (76) बच्चे बरामद किए गए, इसके बाद रायपुर (56) और बिलासपुर (52) का स्थान रहा। लापता होने के प्रमुख कारणों में पारिवारिक विवाद, गरीबी, और सोशल मीडिया के माध्यम से गुमराह होना पाया गया है।

'मिसिंग चिल्ड्रन' रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में पश्चिम बंगाल इस मामले में पहले स्थान पर है, जहां इस अवधि में 19,145 बच्चे लापता हुए। इनमें से 15,465 बच्चों को खोज लिया गया, लेकिन 3,680 बच्चे अब भी लापता हैं। वहीं मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जहां 4,256 बच्चे लापता हुए और इनमें से 1,059 बच्चों का अब तक पता नहीं चल पाया है। नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, लक्षद्वीप और दादरा और नगर हवेलीमें इस अवधि के दौरान बच्चों के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा