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बिहार आंदोलन की विरासत सहेजना नई पीढ़ी के प्रति हमारी जिम्मेदारी : मंत्री प्रमोद कुमार

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बिहार आंदोलन की विरासत सहेजना नई पीढ़ी के प्रति हमारी जिम्मेदारी : मंत्री प्रमोद कुमार


- संपूर्ण क्रांति से लोकतंत्र की पुनर्स्थापना तक, बिहार ने देश को दिखाई राह - आपातकाल की अंधेरी रात के खिलाफ लोकतंत्र की मशाल बना था बिहार

पटना, 24 जून (हि.स.)। हिन्दुस्थान समाचार समूह की ओर से पटना के मीठापुर इंस्टीट्यूशनल एरिया में आयोजित ‘इमरजेंसी के 50 साल : बिहार आंदोलन और आपातकाल’ विषयक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार और चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान (सीआईएमपी), पटना के निदेशक एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. कुमुद कुमार ने लोकतंत्र, बिहार आंदोलन और आपातकाल की विरासत पर विस्तार से अपने विचार रखे।

कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि 1974 के छात्र-युवा आंदोलन और आपातकाल विरोधी संघर्ष की विरासत को सुरक्षित रखना तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक था, लेकिन जनता की लोकतांत्रिक चेतना ने अंततः लोकतंत्र की पुनर्स्थापना सुनिश्चित की।

डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार आंदोलन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए त्याग, संघर्ष, बलिदान और जनशक्ति का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की वास्तविक कहानी और इसके मूल्यों को युवाओं तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र की रक्षा के महत्व को समझ सकें।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान उन्हें बिहार आंदोलन और आपातकाल से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों, अभिलेखों और ऐतिहासिक सामग्रियों को संरक्षित रखने का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण लोकतांत्रिक इतिहास के अध्ययन और नई पीढ़ी को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार आंदोलन ने देश को यह संदेश दिया कि जब लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के प्रश्न सामने हों तो समाज की संगठित शक्ति बड़े से बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष की स्मृतियों को संरक्षित रखना लोकतंत्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष तथा चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना के निदेशक एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. कुमुद कुमार ने कहा कि 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक था। उस दौर में प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित हुई, नागरिक अधिकारों को सीमित किया गया और असहमति के स्वरों को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन लोकतंत्र में जनता की आस्था और जनशक्ति ने अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुनर्स्थापित किया।

उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र को बचाने के संघर्ष की चर्चा की जाए और उसमें बिहार का उल्लेख न हो तो वह चर्चा अधूरी मानी जाएगी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बिहार से उठी ‘संपूर्ण क्रांति’ की आवाज ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को नई दिशा दी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए व्यापक जनजागरण का आधार तैयार किया।

डॉ. कुमुद कुमार ने कहा कि आपातकाल के 50 वर्ष विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल अतीत को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादाओं के महत्व से परिचित कराने का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों दोनों के प्रति सजग रहें।

उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार को राष्ट्रचेतना, सकारात्मक विमर्श और मूल्याधारित पत्रकारिता का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि मीडिया की भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करने और राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत करने की भी है।

डॉ. कुमुद कुमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर दक्षता विकसित करना नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक तैयार करना भी है। इतिहास के ऐसे महत्वपूर्ण अध्याय युवाओं को लोकतंत्र की रक्षा, राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन के लिए निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि बिहार आंदोलन और आपातकाल विरोधी संघर्ष की विरासत केवल ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने की सतत प्रेरणा है। लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक अधिकारों और राष्ट्रचेतना की रक्षा के लिए समाज को सदैव सजग और सक्रिय रहना होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी