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महाराष्ट्र में त्योहारों के लिए एफडीए का ‘फेस्टिव इम्प्लीमेंटेशन कैलेंडर’ शुरू

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महाराष्ट्र में त्योहारों के लिए एफडीए का ‘फेस्टिव इम्प्लीमेंटेशन कैलेंडर’ शुरू


- मिठाई, खाद्य तेल, ऑनलाइन बिक्री और सामुदायिक भोज की होगी विशेष निगरानी

मुंबई, 03 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र में त्योहारों, मेलों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सालभर लागू रहने वाला ‘फेस्टिव इम्प्लीमेंटेशन कैलेंडर’ शुरू किया है। इसके तहत त्योहारों और समारोहों को राज्य, क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर की तीन श्रेणियों में बांटकर जोखिम के आधार पर खाद्य सुरक्षा अभियान चलाया जाएगा।

एफ डीए आयुक्त तुकाराम ने गुरुवार को बताया कि नई व्यवस्था पहले त्योहारों से पहले जारी किए जाने वाले अलग-अलग अस्थायी आदेशों की जगह लेगी। अब अधिकारियों को पूरे वर्ष एक समान व्यवस्था के तहत निरीक्षण और नमूना जांच की योजना बनानी होगी। एफडीए का खाद्य सुरक्षा अभियान चार चरणों में संचालित होगा। पहले चरण में त्योहार से 21 से 15 दिन पहले: संभावित जोखिमों की मैपिंग, सूचना एकत्र करने, टीमों की तैनाती और प्रयोगशालाओं में जांच की तैयारी की जाएगी। दूसरे चरण में त्योहार से 14 दिन से एक दिन पहले तक उत्पादन केंद्रों, थोक बाजारों, कोल्ड स्टोरेज और खाद्य पदार्थों के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का निरीक्षण किया जाएगा। जरूरत के अनुसार रात में भी जांच की जाएगी। तीसरे चरण में त्योहार के दौरान बाजारों और खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने के साथ ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ मोबाइल टेस्टिंग वैन का इस्तेमाल किया जाएगा। उपभोक्ताओं से मिलने वाली शिकायतों पर भी तत्काल कार्रवाई की जाएगी। चौथे चरण में त्योहार के बाद 30 दिन तक प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई, कानूनी प्रक्रिया, जब्त खाद्य पदार्थों के सुरक्षित निपटान और अंतिम रिपोर्ट तैयार करने का काम किया जाएगा। तुकाराम मुंडे ने बताया कि एफडीए ने त्योहारों के दौरान 11 उच्च-जोखिम वाली खाद्य श्रेणियों की पहचान की है। इनमें व्रत का भोजन, दूध और दुग्ध उत्पाद, मिठाइयां, खाद्य रंग, चांदी का वर्क, खाना पकाने का तेल, ऑनलाइन बिकने वाले खाद्य पदार्थ और त्योहारों के गिफ्ट पैक शामिल हैं। व्रत वाले त्योहारों के दौरान भगरी, सिंघाड़े का आटा और साबूदाना जैसे उत्पादों की विशेष जांच की जाएगी। संदिग्ध सिंथेटिक दूध और मिलावटी खाद्य पदार्थों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी जाएगी। मिठाई की दुकानों और उत्पादन केंद्रों पर इस्तेमाल होने वाले खाद्य रंगों की जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल अनुमोदित रंगों का ही इस्तेमाल हो रहा है। मिठाइयों पर इस्तेमाल होने वाले घटिया या गैर-अनुमोदित चांदी के वर्क के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। एफडीए ने अखबार या छपे हुए कागज में खाद्य पदार्थों को लपेटने या परोसने पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। रेस्तरां, खाद्य प्रतिष्ठानों और कैटरर्स द्वारा खाना पकाने के तेल के बार-बार इस्तेमाल की जांच की जाएगी। 25 प्रतिशत से अधिक टोटल पोलर कंपाउंड्स वाला तेल जब्त किया जाएगा। ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थ भी स्नष्ठ्र की निगरानी के दायरे में होंगे। टीमें डार्क स्टोर, माइक्रो-वेयरहाउस और अन्य भंडारण केंद्रों का निरीक्षण कर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी एक्सपायरी डेट की जांच करेंगी। त्योहारों के गिफ्ट पैक में शामिल खाद्य पदार्थों की भी जांच की जाएगी, ताकि एक्सपायरी के करीब या असुरक्षित उत्पाद उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।

तुकाराम मुंडे ने बताया कि बड़े सामुदायिक भोजन आयोजनों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। महाप्रसाद, इफ्तार, लंगर और भंडारे जैसे आयोजनों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। आयोजकों को लाइसेंसधारी कैटरर्स की सेवाएं लेने के निर्देश दिए गए हैं। कैटरर्स को कार्यक्रम की जानकारी कम से कम सात दिन पहले संबंधित अधिकारियों को देनी होगी। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में लोगों को परोसे जाने वाले भोजन की सुरक्षित तैयारी, भंडारण और वितरण सुनिश्चित करना है। आदेश में कानूनी कार्रवाई के लिए समय-सीमा भी तय की गई है। विश्लेषक की रिपोर्ट मिलने के 14 दिनों के भीतर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 42(3) के तहत कार्रवाई की सिफारिश प्रस्तुत करनी होगी। निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जा सकती है। निरीक्षण से जुड़ी जानकारी भी तत्काल स्नह्रस्ष्टह्रस् डिजिटल पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

एफडीए ने खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघनों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक और नियमों का पालन करने वाले खाद्य कारोबारियों को निरीक्षण के नाम पर अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। नई व्यवस्था का उद्देश्य त्योहारों के दौरान खाद्य मिलावट और असुरक्षित भोजन पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ खाद्य कारोबारियों के लिए एक समान और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था स्थापित करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव