home page

हिंदी की प्रगति के लिए अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान और संरक्षण जरूरी:अमित शाह

 | 
हिंदी की प्रगति के लिए अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान और संरक्षण जरूरी:अमित शाह


मुंबई, 14 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नवी मुंबई में कहा कि हिंदी की प्रगति तभी सार्थक होगी, जब वह अन्य भारतीय भाषाओं की गरिमा, संवर्धन और संरक्षण सुनिश्चित करते हुए आगे बढ़े। उन्होंने हिंदी दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भारत की भाषाई विविधता को देश की ताकत बताया।

नवी मुंबई में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत की अनेक भाषाएं किसी कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय भाषा का अपना इतिहास, लोक परंपरा और विश्वदृष्टि है, जो नई पीढ़ी के मूल्यों और दृष्टिकोण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भाषाई विविधता देश में 'विविधता में एकता' की भावना को भी मजबूत करती है।

गृह मंत्री ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समाज की “स्मृति” और “आत्म-जागरूकता” भी होती है। हिंदी ने संवाद, संपर्क और समन्वय की भाषा के रूप में विभिन्न वर्गों और समुदायों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अमित शाह ने कहा, “हिंदी की प्रगति तभी सार्थक होगी जब वह अन्य भारतीय भाषाओं की गरिमा, संवर्धन और संरक्षण सुनिश्चित करते हुए आगे बढ़े।” उन्होंने कहा कि हिंदी को किसी एक भाषा के प्रतिनिधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे भारत की विभिन्न भाषाओं और राष्ट्रीय एकता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में समझने की जरूरत है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गुजराती उनकी मातृभाषा है, लेकिन हिंदी उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों से सीधे जुड़ने में मदद करती है। उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा से जुड़े रहने के साथ दुनिया से सीखने का आह्वान किया। साथ ही माता-पिता से बच्चों के साथ उनकी मातृभाषा में संवाद करने की अपील की।

शाह ने कहा, “भाषा ही वह माध्यम है जो हमें हमारी मातृभूमि, हमारी मिट्टी, हमारे इतिहास और हमारी संस्कृति से जोड़ती है।”

उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था। इसी के उपलक्ष्य में हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव