शाह ने एनएसए अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक पुरस्कार से किया सम्मानित, डोभाल के कार्यों को सराहा
मुंबई, 01 अगस्त(हि.स.)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए)अजीत डोभाल को पुणे में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोकमान्य तिलक के कार्यों को याद किया और अजीत डोभाल की देश सेवा व कामों की खूब तारीफ की।
केंद्रीय गृह मंत्री शाह आज पुणे में लोकमान्य तिलक की 106वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबाेधित कर रहे थे।उन्होंने अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक अवॉर्ड पर से सम्मानित होने पर खुशी जताते हुए उनसे अपनी पहली मुलाकात को याद किया। उन्होंने बताया कि गुजरात में जब बम धमाके हुए थे, उस समय नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री थे और वह गुजरात के गृह मंत्री थे। उन्होंने वह घटना याद की, जब डोभाल को सीनियर पुलिस अधिकारियों से चर्चा करने के बाद आगे के फैसले लेने के लिए कहा गया था। उन्होंने बताया कि उस दौरान उनकी डोभाल से जान-पहचान हुई और गुजरात पुलिस ने देश में हुए 14 बम धमाकों को सुलझाया।
शाह ने कहा कि 1972 से देश के सामने आए हर संकट में अजीत डोभाल का योगदान रहा है और इसका पूरी तरह से आकलन करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि उन्होंने छह साल तक पाकिस्तान में बहुत मुश्किल हालात में काम किया, देश की अंदरूनी सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश की और विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरिक्ष सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी कई सालों तक काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले बारह सालों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ काम कर रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने आज पुणे में आयोजित कार्यक्रम में लोकमान्य तिलक के साथ-साथ लोकतंत्रवादी अन्नाभाऊ साठे को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कि अन्नाभाऊ साठे, जो एक मातंग समुदाय में पैदा हुए थे और अपनी छोटी सी जिंदगी में समाज को जागरूक करने का बड़ा काम किया, एक समाज सुधारक और लेखक थे। उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक के काम को किसी किताब में शामिल करना नामुमकिन है। उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में उनके योगदान का खास जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि तिलक ने लोगों के मन में स्वराज्य की भावना जगाने, गणेशोत्सव और शिव जयंती जैसे सार्वजनिक त्योहारों के ज़रिए समाज को एकजुट करने और राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम किया। उन्होंने कहा कि तिलक एक निडर पत्रकार, कर्मयोगी और राष्ट्रवादी विचारक थे। पत्रकारिता का आदर्श तिलक से लेने की बात कहते हुए उन्होंने युवाओं से 'गीतारहस्य' और लोकमान्य का साहित्य पढऩे की अपील की।
शाह ने यह भी बताया कि पुणे में शिक्षा व्यवस्था को स्थापित करने में तिलक का योगदान अहम था और उन्होंने लोगों को देश को शिक्षा समर्पित करने के लिए प्रेरित किया। यह कहते हुए कि आत्मनिर्भरता, निडरता और स्वराज्य की अवधारणाएँ तिलक के विचारों का एक अहम हिस्सा थीं, उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी को तिलक को 'लोकमान्य' मानना पड़ा था।
पुरस्कार मिलने के बाद अपने संबोधन में एनएसए डोभाल ने युवाओं को आजादी का सही मतलब समझने की बात कही। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व की सहारना की। उन्होंने कहा कि भारत इस समय आंतरिक व बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों से निपट रहा है और तेजी से प्रगति की ओर बढ़ रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

