काम को तनाव नहीं, आनंद का जरिया बनाएं युवा:मनन चतुर्वेदी
नई दिल्ली, 01 जुलाई (हि.स.)। कला और मातृत्व की अनूठी मिसाल मनन चतुर्वेदी ने बुधवार को कहा कि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच युवाओं को अपने हर कार्य को तनाव नहीं, आनंद का जरिया बनाना चाहिए। इसी खुशी से निरंतरता और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
देश भर में 'रंगरेजा' के नाम से मशहूर पेंटर मनन चतुर्वेदी दिल्ली के पालिका बाजार में 24 घंटे लगातार पेंटिंग बनाने के अनूठे लक्ष्य पर जुटी हुई हैं। मंगलवार से शुरू हुआ उनका यह सफर उनके जज्बे को दिखाता है। उत्तर प्रदेश में पैदा हुईं मनन की कर्मभूमि राजस्थान रही है।
मनन ने 'हिन्दुस्थान समाचार' के साथ विशेष साक्षात्कार में कहा, आज के बच्चे किसी भी तरह का दबाव लेकर काम न करें। जिंदगी में खुश रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। जब आप खुश मन से कोई काम करते हैं, तो उसका परिणाम हमेशा खूबसूरत होता है।
सफाई और स्पष्टता को अपनी कला की मुख्य ताकत मानने वाली मनन ने बताया कि वह आज एक अनोखे और चुनौतीपूर्ण मिशन पर हैं, जहां वह अगले 24 घंटों के भीतर करीब 25 पेंटिंग बनाने वाली हैं।
एक अन्य सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि कला किसी दबाव की मोहताज नहीं होती, जैसा हृदय काम करेगा, वैसी ही पेंटिंग खुद-ब-खुद कैनवास पर उभरती चली जाएगी।
अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए मनन ने खुलासा किया कि उनका अगला लक्ष्य देश की आर्थिक और माया नगरी 'मुंबई' है। उनका यह सफर सिर्फ कला तक ही सीमित नहीं है बल्कि सबसे बड़ा और मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को 'छत' (आश्रय और सहारा) देना है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
इससे पहले भी उन्होंने करीब 72 घंटे में लगातार 105 पेंटिंग पेंटिंग बनाकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है। वह बच्चों के हक में जागरुकता फैलाने को लेकर पेंटिंग बनाती हैं। मनन निराश्रित बच्चों के लिए उम्मीद की किरण हैं।
फैशन डिजाइनिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने किसी ग्लैमरस करियर को चुनने के बजाय समाज के ठुकराए हुए बच्चों का जीवन गढ़ने को अपना परम लक्ष्य बनाया। मनन चतुर्वेदी द्वारा संचालित 'सुरमन संस्थान' बेसहारा छोड़ दिए गए बच्चों को न केवल आश्रय देता है बल्कि उन्हें सशक्त और स्वावलंबी भी बनाता है।
उनके एक सहयोगी ने बताया कि फंड जुटाने के लिए मनन 'मनन थियेटर्स' के बैनर तले नाटक और शो आयोजित करती हैं। उनके इसी अद्वितीय मातृत्व भाव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने उन्हें राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बाल सुधार और नवाचार के कई सराहनीय कार्य किए।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

