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‘बुलडोजर कार्रवाई’ के विरोध में ममता बनर्जी ने लिखी कविता, भाजपा ने सिंडिकेट राज हटाये जाने का मलाल बताया

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‘बुलडोजर कार्रवाई’ के विरोध में ममता बनर्जी ने लिखी कविता, भाजपा ने सिंडिकेट राज हटाये जाने का मलाल बताया


कोलकाता, 23 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन और नई भारतीय जनता पार्टी सरकार के गठन के बाद राज्यभर में अवैध निर्माण और फुटपाथ अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए जा रहे अभियान पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कविता के जरिए तीखा प्रहार किया है।

शनिवार को ममता बनर्जी के फेसबुक पेज पर उनकी नई कविता ‘दखल’ पोस्ट की गई। कविता में उन्होंने राज्य में चल रही बुलडोजर कार्रवाई, कथित पुलिस सक्रियता और गरीबों के विस्थापन को मुद्दा बनाते हुए सरकार पर निशाना साधा।

कविता में उन्होंने लिखा, “दखल मुक्त करना होगा/असहाय कमजोर लोगों को/और कितने बुलडोजर?/और कितना अत्याचार?/और कितनी दानविकता?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कविता के माध्यम से प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “नेताओं के ताबेदार अब / डंडावाले रक्षक बन गए हैं/सैकड़ों गिरफ्तारियां क्यों?/कितने पुरस्कार मिल रहे हैं?”

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि फुटपाथ दुकानदारों और गरीब श्रमिकों को हटाकर पुलिस और प्रशासन सरकार को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। कविता के अंतिम हिस्से में उन्होंने नई सरकार पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए लिखा, “अगर जीत ही गए हो/तो लोग इतने भयभीत क्यों हैं?/शाम ढलते ही आधी रात क्यों उतर आती है?”

उन्होंने नई सत्ता व्यवस्था की मानसिकता को “जंजाल” करार देते हुए कहा कि समाज को अतिक्रमण मुक्त करने से पहले शासकों को अपने मन का जंजाल साफ करना चाहिए।

हालांकि, कविता सामने आते ही भाजपा ने पलटवार किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और सिंडिकेट संस्कृति को लेकर खुद ममता बनर्जी ने पूर्व में प्रशासनिक बैठकों में टिप्पणी की थी। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान राजनीतिक संरक्षण में अवैध कब्जे और जमीन सिंडिकेट का नेटवर्क फलता-फूलता रहा।

भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में राज्य में अवैध कब्जे और सिंडिकेट राज को बढ़ावा मिला था और नई सरकार अब कानूनी तरीके से उसे हटाने का काम कर रही है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि इसी कारण विपक्ष इस कार्रवाई का विरोध कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय