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असम के माजुली द्वीप में मिला 4,000 साल पुराने वनस्पति का इतिहास

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असम के माजुली द्वीप में मिला 4,000 साल पुराने वनस्पति का इतिहास


नई दिल्ली, 01 जून (हि.स.)। दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप असम के माजुली में 4,000 वर्षों के जलवायु एवं वनस्पति इतिहास का पता चला है। यहां शोध कर रहे वैज्ञानिकों के मुताबिक यह अध्ययन बाढ़ एवं जलवायु परिवर्तन से प्रभावित क्षेत्रों के लिए भविष्य की अनुकूलन रणनीतियां तैयार करने में मददगार साबित होगा।

लखनऊ स्थित बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज के वैज्ञानिकों ने माजुली के सकाली वेटलैंड से 150 सेंटीमीटर गहरे तलछट नमूने एकत्र कर उनका अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने परागकणों और मिट्टी के कणों के विश्लेषण के जरिए द्वीप के पर्यावरणीय इतिहास का पुनर्निर्माण किया।

अध्ययन के अनुसार लगभग 4040 से 2260 वर्ष पूर्व माजुली क्षेत्र में गर्म और आर्द्र जलवायु थी तथा यहां घने जंगल मौजूद थे। इसके बाद मानसून और बाढ़ के स्वरूप में कई बदलाव आए। 1100 से 500 वर्ष पूर्व के दौरान क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक नमी वाला दौर रहा, जबकि पिछले लगभग 500 वर्षों में तापमान और वर्षा में गिरावट दर्ज की गई।

वैज्ञानिकों ने पाया कि हाल के सदियों में मानव गतिविधियों का प्रभाव बढ़ा है, जिसके कारण प्राकृतिक वनस्पति में बदलाव देखने को मिला। अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि माजुली ने अतीत में कई जलवायु परिवर्तनों एवं प्राकृतिक चुनौतियों का सामना किया है।

ब्रह्मपुत्र और सुबनसिरी नदियों के बीच स्थित माजुली वर्षों से बाढ़ और नदी कटाव की समस्या झेल रहा है। ऐसे में यह शोध क्षेत्र की जलवायु, बाढ़ और पर्यावरणीय बदलावों को समझने तथा भविष्य की आपदा प्रबंधन और संरक्षण नीतियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह अध्ययन ऊपरी ब्रह्मपुत्र घाटी के जलवायु इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाने में सहायता मिलेगी। आर्य पांडे (डीएसटी-इंस्पायर एसआरएफ) और बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) वैज्ञानिक-ई (पर्यवेक्षक) डॉ. स्वाति त्रिपाठी के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में डॉ. साधन कुमार बसुमतारी (बीएसआईपी), डॉ. सलमान खान (जर्मनी), डॉ. हेमा सिंह (बीएचयू), डॉ. बिस्वजीत ठाकुर (बीएसआईपी) और डॉ. अनुपम शर्मा (बीएसआईपी) ने भी सहयोग किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी