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मुसलमानों में राजनीतिक पिछड़ापन दूर करने के लिए प्रबल इच्छा शक्ति ज़रूरी है : सआदतुल्लाह हुसैनी

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मुसलमानों में राजनीतिक पिछड़ापन दूर करने के लिए प्रबल इच्छा शक्ति ज़रूरी है : सआदतुल्लाह हुसैनी


नई दिल्ली, 02 मई (हि.स)। जमाअत ए इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने शनिवार को एंग्लो अरेबिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल अजमेरी गेट के सभागार में मुख्य अतिथि के तौर पर लीडरशिप इन द लाइट आफ कुरान एंंड हदीस विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय मुसलमानों में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लीडरशिप में कमी देखी जा रही है। मुसलमानों में लीडरशिप की कमी की वजह से उन्हें हर तरह के पिछड़ेपन से दो चार होना पड़ा है। राजनीति में लीडरशिप का बड़ा महत्व होता है और राजनीतिक दल हमेशा मुसलमानों की लीडरशिप को कमजोर करने और उभरने से रोकने की कोशिश में लगे रहते हैं। जमाअत अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा नहीं है कि मुसलमान में लीडरशिप को लेकर चिंता व्यक्त नहीं की जाती है। हमेशा इस पर बहस होती है मगर इसमें कामयाबी नहीं मिल पाती है।

उन्होंने कहा कि भारत का मुसलमान वर्तमान राजनीति को सामने रख कर अपनी रणनीति बनाता है जबकि मुसलमानों को चाहिए कि 20-25 साल आगे की राजनीति को सामने रखकर के रणनीति बनाएं तभी उन्हें कामयाबी मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि मुसलमानों में नेतृत्व करने की क्षमता नहीं है जब किसी मुसलमान को ऐसा अवसर मिलता है तो वह इसमें आगे निकलने की कोशिश करता है लेकिन किसी न किसी कारण वश उसे आगे बढ़ने से रोक दिया जाता है। राजनीति में जो मुसलमान कभी आगे बढ़ा भी है तो उनके अंदर मुसलमानों के लिए कुछ कर जाने की इच्छा शक्ति नहीं होती है और वह चाह करके भी कुछ नहीं कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि आज की इस संगोष्ठी में हमें विचार करना चाहिए कि मुसलमान की लीडरशिप को हम आगे कैसे विकसित करें और उन्हें समाज के उत्थान और विकास के लिए कैसे इस्तेमाल करें। जब तक हम इस सोच को लेकर आगे नहीं बढ़ेंगे हमारे देश का मुसलमान राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर हमेशा कमजोर बना रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी समाज का उत्थान और विकास राजनीतिक शक्ति को बढ़ावा देकर किया जा जा सकता है और भारतीय मुसलमानों के पास इसी की कमी है।

इस मौके पर मस्जिदों के जरिए राजनीतिक सशक्तिकरण पर वक्ताओं ने जोर दिया और कहा कि हमारे पास एक ऐसा साधन मौजूद है, जहां मुसलमानों के उत्थान, विकास और राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए मिलजुल कर बात की जा सकती है।

संगोष्ठी में

डॉ. कहकशा़ दानियाल, प्रोफेसर अजरा आबदी, मुफ्ती अताउर्रहमान कासमी, मौलाना सलीम अहमद, मौलाना मुफ्ती साहिल, प्रोफेसर मोहम्मद आदम आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर इंटेलेक्चुअल एंड जूरिस्ट मुस्लिम एसोसिएशन के महासचिव एडवोकेट तारिक फारूकी ने बताया कि संगोष्ठी का मकसद मुस्लिम समाज की समस्याओं को तलाशना और उनका समाधान निकालना है। मुस्लिम समाज में लीडरशिप की कमी के मुद्दे पर बात करना और मुसलमानों में लीडरशिप की कमी पर चर्चा करना और उसे बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में एडवोकेट रईस अहमद, डॉ सलीम अहमद कासमी, शाहीन कौसर, डॉ तस्लीम रहमानी, मुफ्ती अतहर शमसी, फैजान देहलवी, मोहम्मद सुबहान आदि ने भाग लिया।

हिन्दुस्थान समाचार/मोहम्म्द ओवैस

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हिन्दुस्थान समाचार / Abdul Wahid