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लैवेंडर की खेती ने बदली पहाड़ी कस्बा भद्रवाह की पहचान

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लैवेंडर की खेती ने बदली पहाड़ी कस्बा भद्रवाह की पहचान


लैवेंडर की खेती ने बदली पहाड़ी कस्बा भद्रवाह की पहचान


नई दिल्ली, 06 जून (हि.स.)। जम्मू एवं कश्मीर का कभी एक शांत पहाड़ी कस्बे के रूप में जाने जाने वाला भद्रवाह आज देश में लैवेंडर खेती और ग्रामीण उद्यमिता का प्रतीक बन चुका है। इसे लैवेंडर कैपिटल कहा जाने लगा है। पहले यहां मक्के की खेती हुआ करती थी लेकिन केन्द्र सरकार की ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ के तहत अब यहां 1,500 हेक्टेयर क्षेत्र में लैवेंडर की खेती की जा रही है, जिससे 4,500 से अधिक किसान परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इस दौरान 4,000 किलोग्राम से अधिक लैवेंडरका उत्पादन हुआ है और किसानों को 18 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है।

सीएसआईआर-आईआईएम के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने बताया कि 'अरोमा मिशन' के तहत भद्रवाह में लैवेंडर की खेजी 2016-17 में शुरू किया गया था। वर्तमान में भद्रवाह में 4,500 से ज्यादा किसान परिवार इससे जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि किसान इसके फूलों से लैवेंडर का तेल निकाल रहे हैं जिसकी कीमत 10,000 प्रति रुपए लीटर तक होती है। इसके अलावा डिस्टिलेशन से बचे पानी (हाइड्रोसोल) का इस्तेमाल इत्र, साबुन, और अगरबत्ती बनाने में होता है। किसानों की आय दोगुनी भी हो गई है वे अपना स्टार्टअप की शुरुआत भी कर रहे हैं।ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि लैवेंडर की खेती ने भद्रवाह के किसानों की किस्मत बदल दी है।

डॉ. ज़बीर अहमद ने बताया कि लैवेंडर की खेती के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त है। पहाड़ी इलाकों जैसे भद्रवाह की जमीन और ढलान इसके लिए बेहतरीन हैं। उन्होंने बताया कि इस गांव को देखने के लिए अब बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं। किसानों की इस उपलब्धि का जश्म मनाने के लिए अब यहां लैवेंडर फेस्टिवल भी आयोजित किए जा रहे हैं।

महोत्सव में लैवेंडर ऑयल, इत्र, साबुन, कॉस्मेटिक्स, अगरबत्ती और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों की बिक्री के लिेए प्रदर्शनी भी लगाई जाती है। साथ ही स्टार्टअप्स, कृषि तकनीकों और सुगंधित फसलों से जुड़े नवाचारों का भी प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, किसानों, स्टार्टअप उद्यमियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भद्रवाह की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि वैज्ञानिक तकनीक, सरकारी सहयोग और स्थानीय लोगों की भागीदारी मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। भद्रवाह न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश के लिए ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी