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लोकसभा क्षेत्र पुनर्विन्यास पर कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद: प्रह्लाद जोशी

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लोकसभा क्षेत्र पुनर्विन्यास पर कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद: प्रह्लाद जोशी


दावणगेरे, 06 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा क्षेत्र पुनर्विन्यास को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ‘उत्तर-दक्षिण’ के नाम पर देश में विभाजन की राजनीति कर रही है, जो सच्चाई से दूर है।

सोमवार को दावणगेरे में एक पत्रकार वार्ता में केंद्रीय मंत्री जाेशी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस आरोप को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि पुनर्विन्यास के जरिए भाजपा शासित उत्तर भारतीय राज्यों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। जोशी ने स्पष्ट किया कि लोकसभा सीटों का पुनर्विन्यास पूरी तरह जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में मतदाताओं की संख्या 40 से 50 लाख तक बढ़ी है, ऐसे में सभी राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जिसमें कर्नाटक भी शामिल हो सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सिद्धारमैया पर ‘निराधार आरोप’ लगाने का आरोप लगाया। जोशी ने सवाल उठाया कि 2008 में जब पुनर्विन्यास हुआ, तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब इन मुद्दों को क्यों नहीं उठाया गया।

केंद्रीय मंत्री जाेशी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी फैसले जनसंख्या के आधार पर ही लिए गए थे। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय निर्णयों पर नियंत्रण सोनिया गांधी और राहुल गांधी का था।

जोशी ने कहा कि वर्ष 1952, 1963, 1971 और 2001 में भी निर्वाचन क्षेत्र का पुनर्विन्यास जनसंख्या अनुपात के आधार पर ही किया गया था। उन्होंने कांग्रेस पर देश को उत्तर और दक्षिण के आधार पर बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा इस तरह की राजनीति का विरोध करती है और देश की एकता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। जोशी ने यह भी कहा कि कांग्रेस देशभर में कमजोर हो रही है, इसलिए इस तरह के आरोप लगा रही है।

एलपीजी आपूर्ति के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारत में गैस की कोई कमी नहीं है और देश में 70 प्रतिशत तक भंडारण उपलब्ध है। घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य है, जबकि ऑटो एलपीजी में थोड़ी समस्या हो सकती है। उन्होंने बताया कि राज्य में 372 ऑटो एलपीजी केंद्र हैं, जिनमें 72 सरकारी हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी अधिक है और वे आयात के जरिए आपूर्ति बनाए रखे हुए हैं। उन्होंने ऑटो चालकों को अस्थायी रूप से पेट्रोल का उपयोग करने की सलाह भी दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा