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सफदरजंग अस्पताल में पहली बार एक मरीज में लगाए गए डोनर के दोनों गुर्दे

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सफदरजंग अस्पताल में पहली बार एक मरीज में लगाए गए डोनर के दोनों गुर्दे


नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)।

सफदरजंग अस्पताल ने गुर्दा प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार एक ही ब्रेन-डेड डोनर के दोनों गुर्दे एक ही मरीज में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किए गए। किसी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में किया गया यह पहला डुअल किडनी ट्रांसप्लांट है।

इस जटिल प्रत्यारोपण प्रक्रिया का नेतृत्व प्रो. पवन वासुदेवा ने किया। इसमें यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया और गहन चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

62 वर्षीय डोनर के अंगों का किया गया उपयोग

सफदरजंग अस्पताल के अऩुसार 19 सितंबर की रात चंडीमंदिर स्थित कमांड अस्पताल में 62 वर्षीय व्यक्ति को ब्रेन डेड घोषित किया गया था। इसके बाद उनके परिजनों ने अंगदान के लिए सहमति दी। उम्र और अन्य चिकित्सकीय कारणों को देखते हुए डोनर को ‘मार्जिनल डोनर’ की श्रेणी में रखा गया।

विशेषज्ञों ने जांच और चिकित्सकीय आकलन के बाद पाया कि दोनों गुर्दों को अलग-अलग मरीजों में लगाने की तुलना में एक ही मरीज में दोनों गुर्दों का प्रत्यारोपण करना अधिक उपयुक्त होगा। यह निर्णय संभावित जोखिम और लाभ का मूल्यांकन करने के बाद लिया गया। इसके लिए मरीज के परिजनों की सहमति भी ली गई।

क्या होता है डुअल किडनी ट्रांसप्लांट?

आम तौर पर एक डोनर का एक गुर्दा एक मरीज में प्रत्यारोपित किया जाता है। लेकिन कुछ डोनर ऐसे होते हैं जिनके गुर्दों की कार्यक्षमता अकेले एक गुर्दे के रूप में किसी मरीज के लिए पर्याप्त मानी नहीं जाती। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच के बाद दोनों गुर्दों को एक ही मरीज में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।

इसे डुअल किडनी ट्रांसप्लांट कहा जाता है। इसका उद्देश्य उपलब्ध दाता अंगों का अधिक प्रभावी उपयोग करना और ऐसे गुर्दों को भी प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल करना है, जिन्हें अकेले प्रत्यारोपित करने पर अपेक्षित लाभ कम मिलने की आशंका हो सकती है।

अंगों की लगातार कमी के बीच इस तकनीक को ‘मार्जिनल डोनर’ से प्राप्त अंगों के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, प्रत्येक मामले में दोनों गुर्दों का एक मरीज में प्रत्यारोपण करने का निर्णय डोनर और मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के विस्तृत आकलन के बाद ही लिया जाता है।

भारतीय वायुसेना ने निभाई अहम भूमिका

अंगदान के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। डोनर से अंग निकालने के बाद उन्हें निर्धारित समयसीमा में संबंधित अस्पताल तक पहुंचाना जरूरी होता है। इस मामले में भी अंगों को चंडीमंदिर से दिल्ली पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के पश्चिमी कमान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारतीय वायुसेना ने अंगों को दिल्ली तक समय पर पहुंचाने के लिए हवाई परिवहन उपलब्ध कराया। डोनर का यकृत आर्मी अस्पताल (आरएंडआर) को आवंटित किया गया, जबकि दोनों गुर्दे सफदरजंग अस्पताल को मिले।

समय पर अंगों को दिल्ली पहुंचाए जाने से प्रत्यारोपण प्रक्रिया को निर्धारित समय के भीतर आगे बढ़ाने में मदद मिली।

कई विभागों की संयुक्त मेहनत

डुअल किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया के लिए केवल एक विभाग की विशेषज्ञता पर्याप्त नहीं होती। इस मामले में यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया और गहन चिकित्सा विभाग की टीमों ने समन्वय के साथ काम किया।

प्रो. पवन वासुदेवा के नेतृत्व में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की बहु-विषयक टीम ने मरीज के लिए दोनों गुर्दों के प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की। इस तरह की प्रक्रिया में डोनर के अंगों की गुणवत्ता, मरीज की स्थिति और संभावित लाभ-जोखिम समेत कई चिकित्सकीय पहलुओं का आकलन किया जाता है।

भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि- जेपी नड्डा

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने इस ट्रांसप्लांट को भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने एक्स पर साझा किए अपने संदेश में कहा कि

वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की पूरी टीम को पहला डुअल किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक करने पर हार्दिक बधाई। बताया जा रहा है कि यह किसी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में किया गया इस प्रकार का पहला प्रत्यारोपण है।

इस सफल प्रत्यारोपण के लिए उन्होंने समर्पित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ एयर फोर्स का भी हृदय से आभार व्यक्त किया जिन्होंने कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर से दिल्ली तक दाता अंगों को समय पर पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि

यह भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गर्व का क्षण है और अंगदान एवं प्रत्यारोपण के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों का जीवन बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी