जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन: सरकार ने छात्रों को वार्ता के लिए बुलाया, मुख्यमंत्री आवास जाने से किया इनकार
रांची, 05 अगस्त (हि.स.)। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी), झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) तथा अन्य प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनरत छात्रों को राज्य सरकार ने वार्ता का प्रस्ताव दिया है। बुधवार को अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और अपर जिलाधिकारी (एडीएम-लॉ एंड ऑर्डर) धरनास्थल पहुंचे और छात्र प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री से बातचीत का निमंत्रण सौंपा।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि मुख्यमंत्री ने शाम चार बजे मुख्यमंत्री आवास पर छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक प्रस्तावित की है। इसके तहत पांच छात्र प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया, ताकि आंदोलनकारियों की मांगों पर विस्तार से चर्चा कर समाधान की दिशा में पहल की जा सके।
हालांकि, आंदोलनरत छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास जाकर वार्ता करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था कि यह किसी पांच व्यक्तियों का निजी मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे राज्य के प्रतियोगी छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा जनआंदोलन है। इसलिए यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो मुख्यमंत्री स्वयं धरनास्थल पर आकर सभी छात्रों के बीच खुली बातचीत करें।
छात्रों ने कहा कि केवल वार्ता का निमंत्रण देना पर्याप्त नहीं है। सरकार को 14वीं जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल, टीडीपीएल तथा अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने, पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने तथा आंदोलन के दौरान उठाई गई मांगों पर ठोस कार्रवाई का स्पष्ट आश्वासन देना होगा।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना, सत्याग्रह और आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल कुछ अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के भविष्य का प्रश्न है।
छात्रों ने यह भी कहा कि सरकार यदि संवाद के माध्यम से समाधान चाहती है तो बंद कमरे में सीमित प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के बजाय सार्वजनिक रूप से धरनास्थल पर आकर सभी आंदोलनरत छात्रों के समक्ष अपना पक्ष रखे। उनका मानना है कि इससे सरकार की मंशा स्पष्ट होगी और आंदोलन में शामिल सभी अभ्यर्थियों का विश्वास भी कायम रहेगा।
उल्लेखनीय है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के विरोध में अभ्यर्थी 29 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे हैं। आंदोलनकारी परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

