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स्टार्टअप के नवाचारों को बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रही सरकार: जितेंद्र सिंह

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स्टार्टअप के नवाचारों को बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रही सरकार: जितेंद्र सिंह


नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (हि.स.केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार स्टार्टअप और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य देश में विकसित नवाचारों को शोध एवं विकास के स्तर से आगे ले जाकर व्यावसायिक उपयोग और व्यापक बाजार तक पहुंचाना है। उन्होंने उद्योग जगत, निवेशकों और अनुसंधान संस्थानों से स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप के साथ साझेदारी करने का आह्वान किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी)-2026 की प्रदर्शनी का दौरा किया। 27 से 29 अक्टूबर तक चल रहे इस सम्मेलन में 50 चयनित डीप-टेक स्टार्टअप, 13 विभागीय स्टॉल और 10 विभागीय तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन स्टार्टअप, वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योगों को आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशने का मंच प्रदान करता है।

नवाचारों को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने पर जोर

देते हुए

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का जोर वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग और व्यापक स्तर पर अपनाने से जोड़ने पर है। इसके लिए शोध संस्थानों, स्टार्टअप, उद्योगों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

उन्होंने उद्योग जगत, निवेशकों और अनुसंधान संस्थानों से स्वदेशी तकनीक विकसित करने वाले उद्यमियों के साथ मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से नई तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने, देश की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

पोषक चावल और स्वदेशी माइक्रोकंट्रोलर आकर्षण का केंद्र

प्रदर्शनी में वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए विकसित कई तकनीकों और उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इनमें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अंतर्गत राष्ट्रीय अंतर्विषयी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईआईएसटी) द्वारा विकसित डिजाइनर राइस प्रमुख रहा।

इस चावल में लगभग 20 प्रतिशत प्रोटीन है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 54 बताया गया है, जो इसे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली श्रेणी में रखता है। इसे चावल के विभिन्न अंशों और उनकी संरचना में बदलाव की तकनीक से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य बेहतर पोषण संबंधी गुणों वाले खाद्य उत्पाद तैयार करना है।

प्रदर्शनी में सिग्नलचिप का स्वदेशी माइक्रोकंट्रोलर ‘जीत’ (एससीएमसी4212) भी प्रदर्शित किया गया। इसमें यति 32-बिट आरआईएससी-वी सीपीयू और आवर्ता 32-बिट डिजिटल सिग्नल प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। इसके संभावित उपयोग विमान नियंत्रण प्रणाली, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) उपकरणों, रोबोटिक्स और औद्योगिक स्वचालन जैसे क्षेत्रों में हो सकते हैं। यह तकनीक देश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।

इसके अलावा जैव-आधारित पैकेजिंग और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी