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आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने चिरांद के पुरातात्विक एवं धार्मिक स्थलों का किया भ्रमण

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आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने चिरांद के पुरातात्विक एवं धार्मिक स्थलों का किया भ्रमण


पटना, 21 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले बुधवार को बिहार के सारण जिले में स्थित चिरांद के एक दिवसीय प्रवास पर पहुंचे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने गंगा, सरयू और सोन नदी के त्रिवेणी संगम तट पर स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व वाले चिरांद स्थल का भ्रमण किया और यहां स्थित विभिन्न प्राचीन मठों एवं मंदिरों का अवलोकन किया।

सरकार्यवाह होसबाले ने चिरांद के पुरातात्विक स्थल का निरीक्षण करते हुए इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शोध संबंधी महत्व की विस्तार से जानकारी ली। इसके उपरांत वे गंगा तट पर स्थित प्राचीन अयोध्या मंदिर पहुंचे, जहां लक्षण किलाधीश आचार्य मैथिली रमन शरण जी महाराज ने उनका पारंपरिक रूप से स्वागत किया। मंदिर परिसर में उपस्थित रामायण विशेषज्ञों ने उन्हें चिरांद की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से अवगत कराया।

रामायण विशेषज्ञों ने बताया कि अयोध्या से गुरु विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण गंगा, सरयू और सोन के इस त्रिवेणी संगम पर पहुंचे थे और यहां रात्रि विश्राम किया था। रामायण के अनुसार, यह क्षेत्र भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। मान्यता है कि इस स्थान पर भगवान शिव (स्थानु) ने हजारों वर्षों तक तपस्या कर जो ज्ञान प्रकट किया, उसी परंपरा को आगे चलकर वेदों में कल्प सूत्र के रूप में संकलित किया गया।

बताया गया कि तपस्वी शिव यानी स्थानु ने ऋषि विभाण्डक के माध्यम से कल्प विद्या की परंपरा प्रारंभ की थी, जिसे बाद में उनके पुत्र ऋषि श्रृंगी ने आगे बढ़ाया। यह क्षेत्र ऋषि श्रृंगी की जन्मस्थली के रूप में भी विख्यात है, जिससे चिरांद का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

चिरांद प्रवास के दौरान सरकार्यवाह के साथ जेपी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार वाजपेई, विधान परिषद सदस्य सच्चिदानंद राय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कुलपति वाजपेई ने चिरांद को लेकर शोध, अध्ययन और विकास परियोजनाओं से संबंधित अपने विचार साझा किए, वहीं एमएलसी सच्चिदानंद राय ने इसे विश्व स्तरीय सांस्कृतिक और शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर चर्चा की। इस अवसर पर पुरातत्वविद अनन्त आशुतोष द्विवेदी ने चिरांद के समग्र विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की।

अयोध्या मंदिर दर्शन के बाद सरकार्यवाह चिरांद विकास परिषद के कार्यालय पहुंचे, जहां परिषद के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ इस दुर्लभ पुरातात्विक स्थल के संरक्षण और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। परिषद के अध्यक्ष कृष्णकांत ओझा, सचिव श्रीराम तिवारी और कोषाध्यक्ष राशेश्वर सिंह ने परिषद की अबतक की गतिविधियों और भावी योजनाओं की जानकारी दी।

इस अवसर पर प्रसिद्ध पुरातत्वविद् आशुतोष अनन्त द्विवेदी और पुरातत्व निदेशालय के निदेशक विमल तिवारी ने यहां की गई पुरातात्विक खुदाइयों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि चिरांद में प्राप्त अवशेष विश्व के विरले और अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों में गिने जाते हैं, जो मानव सभ्यता के प्रारंभिक काल को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त