home page

दस साल से रेंगकर चलने को मजबूर लुगरी, इलाज और सरकारी मदद की आस, जांच दल भेजेगा प्रशासन

 | 
दस साल से रेंगकर चलने को मजबूर लुगरी, इलाज और सरकारी मदद की आस, जांच दल भेजेगा प्रशासन


दस साल से रेंगकर चलने को मजबूर लुगरी, इलाज और सरकारी मदद की आस, जांच दल भेजेगा प्रशासन


पूर्वी सिंहभूम, 07 सितंबर (हि.स.)। पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा प्रखंड की भालकी पंचायत के नामो लेपो गांव में 40 वर्षीय लुगरी सबर की जिंदगी पिछले करीब दस वर्षों से दर्द और बेबसी के बीच गुजर रही है। पैरों और कमर में लगातार असहनीय दर्द के कारण वह अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही हैं। घर के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए उन्हें रेंगकर चलना पड़ता है। बीमारी ने उनकी जिंदगी को मानो एक ही जगह रोक दिया है।

लुगरी का परिवार भी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उनके पति गुरा सबर जंगल से लकड़ी लाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दंपती के चार बच्चे हैं। गुरा के भाई की कैंसर से मौत के बाद उसके तीन बच्चे भी इसी परिवार के साथ रहने लगे। इस तरह बीमार पत्नी और सात बच्चों की जिम्मेदारी ने गुरा के सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

आर्थिक संकट के बीच लुगरी को अब तक पेंशन का लाभ भी नहीं मिल सका है। परिवार को सरकारी राशन मिलने में भी परेशानी होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार आधार से जुड़े फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी के कारण परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत हो रही है।

परिवार की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद पंचायत समिति सदस्य सरस्वती हेम्ब्रम ने गुड़ाबांदा के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) से बातचीत की है। उन्होंने लुगरी के परिवार को पेंशन, राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए पहल की है।

हालांकि, लुगरी के सामने इस समय सबसे बड़ी जरूरत सरकारी कागजात या योजनाओं का लाभ नहीं, बल्कि इलाज की है। करीब दस वर्षों से दर्द झेल रही लुगरी आज भी इस उम्मीद में हैं कि कोई उनकी पीड़ा को समझेगा, मदद का हाथ बढ़ाएगा और उन्हें बेहतर इलाज मिल सकेगा, ताकि वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

बीमारी के कारण लुगरी का जीवन घर की चारदीवारी तक सिमट गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह अपने स्तर पर लंबे समय तक इलाज का खर्च उठा सके। ऐसे में सरकारी सहायता और समुचित चिकित्सा सुविधा उनके लिए बड़ी उम्मीद बनी हुई है।

इस संबंध में जिला उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि मंगलवार को एक जांच दल गांव भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच के बाद पीड़ित परिवार की स्थिति का आकलन किया जाएगा और सरकारी स्तर पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

अब प्रशासनिक जांच के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लुगरी को किस प्रकार की चिकित्सा सहायता की जरूरत है और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ किस तरह उपलब्ध कराया जा सकता है। दस वर्षों से दर्द झेल रही लुगरी और उनके परिवार को प्रशासन की पहल से राहत की उम्मीद है।---------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक