(साक्षात्कार) तथ्यों के आधार पर देंगे विपक्ष के आरोपों का जवाब: बृजगोपाल लोया
- भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया से हिन्दुस्थान समाचार की विशेष बातचीत
भोपाल, 19 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया डिजिटल मीडिया की चुनौतियों, विपक्ष के आरोपों और सरकार की छवि को लेकर पार्टी की रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि तथ्यों के आधार पर विपक्ष को जवाब दिया जाएगा और मीडिया विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक पेशेवर बनाया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में उन्होंने मीडिया रणनीति, जनता के सवालों और संगठन-सरकार के समन्वय पर अपनी बात रखी।
सवाल: मीडिया विभाग में आपकी प्रमुख प्राथमिकताएं क्या होंगी?
बृजगोपाल लोया: मध्य प्रदेश भाजपा का मीडिया विभाग टीम और क्षमता, दोनों लिहाज से समृद्ध है। पूर्व मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल जिस स्तर पर इसे तैयार करके दिल्ली गए हैं, उसे बनाए रखना अपने आप में चुनौती है। हमारी कोशिश होगी कि उस स्तर को बरकरार रखते हुए कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाया जाए।
डिजिटल और सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के साथ राष्ट्र, सरकार या किसी व्यक्ति के विरोध में नैरेटिव स्थापित करने के प्रयास होते हैं। इनकी मॉनिटरिंग करना और तथ्यों के आधार पर सही जानकारी मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता होगी। इसके लिए विभाग को अधिक प्रशिक्षित और पेशेवर बनाने के साथ रैपिड रिस्पॉन्स की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।
सवाल: विपक्ष की रणनीति का मुकाबला कैसे करेंगे?
बृजगोपाल लोया: मध्य प्रदेश में हमारे लिए सुखद स्थिति है कि विपक्ष गंभीरता से मुद्दों को आगे नहीं बढ़ा पा रहा है। कांग्रेस तथ्यहीन और तर्कहीन बातें करती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार क्षणिक सुर्खियों के लिए बयानबाजी करते हैं। वे एक-दो दिन किसी मुद्दे पर बात करते हैं और फिर दूसरे मुद्दे पर चले जाते हैं। मुद्दा वही बनता है, जिससे समाज जुड़ता है, लेकिन कांग्रेस अपने मुद्दों को समाज से जोड़ने में सफल नहीं रही है।
सवाल: सोशल मीडिया पर पार्टी की विश्वसनीयता कैसे बनाए रखेंगे?
बृजगोपाल लोया: भाजपा मानती है कि झूठ के पैर नहीं होते और अंततः सत्य की विजय होती है। पार्टी में सिखाया जाता है कि जिस मुद्दे पर हम अपना पक्ष रखें, उस पर दृढ़ता से खड़े रहें। लेकिन पहले यह भी विचार करना चाहिए कि वह हमारे सिद्धांतों और विचारधारा के अनुरूप है या नहीं। हमारी वैचारिक प्रतिबद्धता लंबे समय से रही है। 1951 में जनसंघ के दौर से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का संकल्प था। इसी तरह अनुच्छेद 370 हटाने और समान नागरिक संहिता जैसे विषयों पर पार्टी ने अपना पक्ष रखा। अब देखिए पांचवीं पीढ़ी ने उस पीढ़ी के सपने काे साकार कर दिखाया। यह है वास्तविक नेरेटिव और जब वास्तविक नेरेटिव हाेता है ताे थाेड़ी देर के लिए उलझन हाेती है। खास ताैर से जैसा आपने साेशल मीडिया के लिए कहा ताे साेशल मीडिया के गुण भी है और दाेष भी है। सोशल मीडिया ने सूचना के प्रसार की गति बढ़ा दी है। अब घटनाओं की जानकारी तत्काल मिलती है, इसलिए चौबीसों घंटे सक्रिय रहना और तेजी से प्रतिक्रिया देना जरूरी है। हमारी कोशिश होगी कि सही जानकारी समय पर जनता तक पहुंचे।
सवाल: सरकार की छवि या जनता के सवाल- प्राथमिकता क्या है?
बृजगोपाल लोया: जनता के सवालों के बिना सरकार की छवि नहीं हो सकती। हम दोनों को रेल की दो पटरियों की तरह देखते हैं, जो समानांतर चलती हैं। हम इनकाें एक दूसरे के विरूद्ध नहीं मानते। जो राजनीतिक दल जनता के मत, मंशा और इच्छा को अपने विरुद्ध मानते हैं, वे लंबे समय तक नहीं चल पाते। आज सूचना और तकनीक के दौर में बातें सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहती हैं। जनता की अपेक्षाएं और सरकार की छवि एक-दूसरे के पूरक हैं। जनता की संतुष्टि ही सरकार का लक्ष्य होना चाहिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय का विचार भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने और उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने पर आधारित है।
सवाल: विपक्ष के आरोपों का जवाब कैसे देंगे?
बृजगोपाल लोया: विपक्ष के आरोपों की प्रकृति के अनुसार जवाब दिया जाएगा। आरोप झूठे होंगे तो तथ्यों के आधार पर और राजनीतिक होंगे तो राजनीतिक तरीके से जवाब देंगे। लेकिन विपक्ष यदि झूठ बोलेगा, तो हम उसे बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेंगे। हमने बचपन में हॉकी खेली है। खेल से सीखा है कि आक्रमण ही रक्षा का सर्वोत्तम उपाय है। भाजपा तथ्यों के आधार पर मजबूती से अपना पक्ष रखेगी और जरूरत पड़ने पर राजनीतिक स्तर पर भी आक्रामक रुख अपनाएगी। सच के आधार पर अपनी बात रखना और विचारधारा पर दृढ़ रहना ही हमारी ताकत है।
सवाल: वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों से पार्टी की छवि प्रभावित नहीं होती?
बृजगोपाल लोया: मतभेद होना मानवीय स्वभाव है। सभी लोगों के विचार एक जैसे नहीं हो सकते, लेकिन जरूरी नहीं कि हर मतभेद टकराव में बदले। भाजपा में कार्यकर्ताओं को ऐसे संस्कार दिए जाते हैं, जो छाेटे कार्यमर्ताओं से लेकर बड़े नेताओं पर भी लागू होते हैं। इन्हीं संस्कारों के कारण मतभेद टकराव में नहीं बदलते। भाजपा में संगठन सर्वोपरि है। सरकार संगठन के विचारों और निर्धारित नीतियों को क्रियान्वित करके जनता तक पहुंचाने का माध्यम है। सत्ता हमारे लिए साधन है, साध्य नहीं। संगठन की विचारधारा और नीतियों को जमीन पर उतारना सरकार की जिम्मेदारी है। हमारा मानना है कि संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना सबसे महत्वपूर्ण है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

