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इंदौर में बना 67वां ग्रीन कॉरिडोर, ब्रेन डेड युवक के अंगदान से 3 मरीजों को मिला नया जीवन

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इंदौर में बना 67वां ग्रीन कॉरिडोर, ब्रेन डेड युवक के अंगदान से 3 मरीजों को मिला नया जीवन


- लिवर और दोनों किडनी तीन मरीजों को की गई ट्रांसप्लांट

इंदौर, 24 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बार फिर मानवता की एक मिसाल पेश की गई है, जहां ब्रेन हेमरेज के कारण ब्रेनडेड घोषित किए गए एक युवक के अंगदान से तीन मरीजों को नया जीवन मिला। इसके लिए मंगलवार को इंदौर में 67वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

शुजालपुर निवासी एक 34 वर्षीय युवक अनुपम नालमे (34) के ब्रेन डेड होने के बाद उसके परिवार ने अंगदान का फैसला लिया। मंगलवार को बने 67वें ग्रीन कॉरिडोर के जरिए लिवर और उसकी दोनों किडनी तीन मरीजों को ट्रांसप्लांट की गईं। इस परोपकारी कार्य के चलते दो महिलाओं सहित तीन जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिल गई।

संस्था मुस्कान द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार ब्रेनडेड घोषित किए गए अंगदानी युवक की एक किडनी और एक लिवर सीएचएल हॉस्पिटल में उपचाराधीन दो महिला मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए। इसके अतिरिक्त युवक की दूसरी किडनी का प्रत्यारोपण शैल्बी हॉस्पिटल में भर्ती एक पुरुष मरीज में किया गया।

जानकारी के मुताबिक, शाजापुर के रहने वाले अनुपम नालमे को 20 मार्च को घर पर सीवियर ब्रेन हेमरेज हुआ था। उन्हें पहले वी-वन हॉस्पिटल और फिर 22 मार्च को सीएचएल केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने दो बार जांच के बाद ब्रेन डेड घोषित किया। मुस्कान ग्रुप के सेवादारों की काउंसलिंग के बाद परिवार ने अंगदान की सहमति दी। परिजनों ने अधिक से अधिक अंग दान करने की इच्छा जताई।

मंगलवार दोपहर लिवर और एक किडनी सीएचएल हॉस्पिटल में भर्ती 44 और 34 वर्षीय महिलाओं को ट्रांसप्लांट की गई। दूसरी किडनी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर शैल्बी हॉस्पिटल पहुंचाई गई, जहां 39 वर्षीय पुरुष को प्रत्यारोपित की गई।

परिवार की इच्छा पर हाथ, पैंक्रियाज, बोन, हार्ट वाल्व और छोटी आंत के लिए SOTO और NOTO ने राष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट जारी किया। हालांकि तकनीकी कारणों और तत्काल जरूरत नहीं होने से इनका ट्रांसप्लांट नहीं हो सका। अनुपम की त्वचा भी दान की गई है, जिससे अन्य मरीजों के उपचार में उपयोग किया जाएगा।

परिजनों के अनुसार अनुपम सिविल इंजीनियर थे और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते थे। परिवार ने बताया कि वह हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे रहते थे। अंगदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुपम को शहीदों जैसा सम्मान देते हुए गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान परिजन और अस्पताल स्टाफ मौजूद रहे।

मुस्कान संस्था के काउंसलर संदीपन आर्य ने बताया कि पेशे से इंजीनियर अनुपम नालमे के परिवार ने संभावित अंगदान की प्रक्रिया के लिए मुस्कान ग्रुप के सेवादारों से संपर्क साधा था। सकारात्मक काउंसलिंग और परिवार की इच्छाशक्ति के कारण अंगदान की आधिकारिक मंजूरी प्राप्त हुई। इस पुनीत कार्य में दिवंगत के पिता जगदीश, बुआ डॉ वर्षा और भाइयों अनुराग व जुबीन नालमे का विशेष सहयोग रहा। अंगदान के बाद युवक का शव जब गृह नगर पहुंचा तो लोगों ने शवयात्रा पर पुष्पवर्षा की और हजारों लोगों ने तालियां बजाकर अंगदान के निर्णय का सम्मान किया। वहीं प्रशासन ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर