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(अपडेट) समुद्री रास्ते से सिंगापुर पहुंचे भारतीय आम, निर्यात लागत में आई बड़ी कमी

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(अपडेट) समुद्री रास्ते से सिंगापुर पहुंचे भारतीय आम, निर्यात लागत में आई बड़ी कमी


नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। भारतीय आमों के निर्यात में एक बड़ी सफलता मिली है। आंध्र प्रदेश के 4.3 टन बंगनपल्ली आम समुद्री रास्ते से सिंगापुर भेजे गए और वहां अच्छी गुणवत्ता के साथ पहुंचे।

अब तक आमों को ज्यादातर हवाई जहाज से भेजा जाता था, जिससे खर्च बहुत ज्यादा आता था। हवाई मार्ग से लागत 150 से 250 रुपये प्रति किलो तक होती है, जबकि समुद्री मार्ग से यह केवल 13 से 20 रुपये प्रति किलो रही। इससे किसानों और निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआऱ) और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण(एपीडा) ने मिलकर ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे आम लंबे सफर के दौरान भी ताजे बने रहते हैं। इस तकनीक की मदद से आमों की शेल्फ लाइफ 30 दिन तक बढ़ गई है।

सिंगापुर पहुंचने में 16 दिन लगे, लेकिन आमों की गुणवत्ता और स्वाद में कोई कमी नहीं आई।

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति कर बताया कि इस शिपमेंट की सफलता से सिंगापुर, मलेशिया, हांगकांग और अन्य बाज़ारों में भारतीय आम के निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहाँ अभी आयात का अनुमान 4–5 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। साथ ही, इससे यूएई जैसे बड़े बाज़ारों में भी मौके बनेंगे, जिनका मूल्य 20–25 मिलियन अमेरिकी डॉलर है।

किफ़ायती समुद्री शिपमेंट के तरीके विकसित होने से भारत के आम निर्यात इकोसिस्टम को मज़बूती मिलने, किसानों की आय बढ़ने, निर्यात में प्रतिस्पर्धा की क्षमता बेहतर होने और बागवानी क्षेत्र के टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यह सफल खेप किफ़ायती और टिकाऊ लॉजिस्टिक्स समाधानों के ज़रिए भारत से ताज़े आम के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है, जिससे दुनिया भर में किसानों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं को फ़ायदा होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी