भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता आर्थिक प्रगति का नया अध्याय, युवाओं के लिए खुलेंगे अवसर : शेखावत
जयपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को देश की आर्थिक प्रगति के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, अपितु इससे देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
जयपुर एयरपोर्ट पर बुधवार को मीडिया से बातचीत में शेखावत ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अपनाई गई राष्ट्रहित सर्वोपरि वाली कूटनीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत या राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर देश के दीर्घकालिक हितों को केंद्र में रखते हुए वैश्विक स्तर पर भारत की साख मजबूत की है। इसी नीति के तहत दुनिया के अनेक देशों के साथ व्यापार समझौते हुए हैं और यूके के साथ हुआ समझौता भी उसी दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि भारत और यूके के बीच हुआ यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। इससे भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को व्यापक अवसर मिलेंगे और युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता भारत की आर्थिक प्रगति को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
महिला आरक्षण को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा सरकार पर उठाए गए सवालों के संबंध में पूछे जाने पर शेखावत ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और उनके राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर कांग्रेस की सोच और उसका इतिहास पूरे देश के सामने है। उन्होंने कहा कि जब महिला आरक्षण को लागू करने का अवसर आया, तब विपक्ष के कई दलों का वास्तविक चेहरा भी देश ने देखा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य देश की महिलाओं को केवल बराबरी का अधिकार देना नहीं, अपितु उन्हें विकास यात्रा का नेतृत्वकर्ता बनाना है और महिला आरक्षण उसी दिशा में एक ऐतिहासिक एवं निर्णायक कदम है।
शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार केवल वूमेन एम्पावरमेंट की बात नहीं करती, अपितु वूमेन-लेड डेवलपमेंट के विजन पर काम कर रही है। इसी सोच के तहत चुनाव के माध्यम से चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि विधेयक के लागू होने की संभावनाओं से ही कुछ राजनीतिक दलों की बेचैनी और महिलाओं के प्रति उनका नकारात्मक दृष्टिकोण सामने आने लगा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

