(लीड) भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता, एआई के क्षेत्र में करेंगे सहयोग
नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स.)। भारत और जापान गुरुवार को आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में बड़े स्तर पर सहयोग करने को सहमत हुए हैं। दोनों देशों के बीच आज 16 बिन्दुओं पर सहमति बनी। इसमें आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणापत्र, एआई के क्षेत्र में सहयोग पर संयुक्त वक्तव्य और ऊर्जा लचीलापन पर संयुक्त वक्तव्य शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज अपनी समकक्ष सनाए तकाइची के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखरवार्ता में भाग लिया। वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य दिया जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने तकाइची को ‘छोटी बहन’ कहकर संबोधित किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस दौरान भारत-जापान संबंधों के सभी पहलुओं पर व्यापक वार्ता हुई, जिनमें व्यापार एवं निवेश, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियां, रक्षा और जन-समुदाय आदान-प्रदान शामिल थे। उन्होंने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया। वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख प्राथमिकताओं पर ठोस प्रगति हुई।
उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने तीन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपनाया- आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणापत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग पर संयुक्त वक्तव्य और ऊर्जा लचीलापन पर संयुक्त वक्तव्य। दोनों नेताओं ने आर्थिक सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान एवं विकास से संबंधित प्रमुख समझौता ज्ञापनों और समझौतों के आदान-प्रदान को देखा। दोनों पक्ष राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाली गतिविधियों की सूची पर सहमत हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में कहा कि अगले 10 सालों में भारत जापान से 10 ट्रिलियन येन (जापानी मुद्रा) के निवेश और देश में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
वार्ता के बाद पत्रकार वार्ता में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने में हमारी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की भूमिका को भी स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि आज की बैठकों से कई महत्वपूर्ण परिणाम निकले हैं, जो मोटे तौर पर तीन प्रमुख क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। ये क्षेत्र हैं आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और प्रौद्योगिकी एवं नवाचार। वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, आर्थिक सुरक्षा, रक्षा, आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ीकरण, प्रौद्योगिकी, नवाचार और जन-समुदाय आदान-प्रदान सहित कई क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे शांति, समृद्धि और स्थिरता के संदर्भ में हमारी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की भूमिका को स्वीकार किया।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि बहुपक्षीय मोर्चे पर दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में तत्काल सुधार के लिए अन्य जी4 देशों के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार शामिल है, जिसका अधिकांश सदस्य देश समर्थन करते हैं, ताकि वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित किया जा सके।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की, जिसमें पाकिस्तान से होने वाला सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है। उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की घोर निंदा की ।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता के साथ-साथ सुरक्षा को खतरे में डालने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई और बल या दबाव द्वारा यथास्थिति को बदलने के प्रयासों के प्रति अपने कड़े विरोध को दोहराया।
प्रधानमंत्री ताकाइची ने यात्रा के दौरान दिए गए आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया और अगले वर्ष 17वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

