भारत-ईयू एफटीए पर जल्द सहमति की उम्मीद, साझा बाजार से बढ़ेंगे आर्थिक अवसर : मिक्को किविकोस्की
नई दिल्ली, 05 अक्टूबर (हि.स.)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और शेष तकनीकी एवं विनियामक मुद्दों पर जल्द सहमति बनने की उम्मीद है। भारत में फिनलैंड के नवनियुक्त राजदूत मिक्को किविकोस्की ने कहा कि आवश्यक कानूनी समीक्षा और दोनों पक्षों की संसदों से मंजूरी के बाद समझौता प्रभावी हो सकेगा। उम्मीद है इस साल के अंत तक यह समझौता हो जाएगा। एफटीए भारत और यूरोप के करीब दो अरब लोगों के लिए एक बड़ा साझा बाजार तैयार करेगा और वैश्विक अनिश्चितता के बीच दोनों पक्षों के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा।
भारत में फिनलैंड के नवनियुक्त राजदूत मिक्को किविकोस्की ने यहां सोमवार को चाणक्यपुरी स्थित फिनलैंड दूतावास में अपनी पहली औपचारिक पत्रकार वार्ता में कहा कि एफटीए के साथ भारत और ईयू के बीच निवेश संरक्षण समझौते (आईपीए) और भौगोलिक संकेतक (जीआई) से जुड़े मुद्दों पर भी समानांतर बातचीत चल रही है। इन समझौतों से व्यापार और निवेश के लिए अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी माहौल तैयार होने की उम्मीद है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में लगातार आ रहे बदलावों के बीच भारत और ईयू एक-दूसरे को विश्वसनीय आर्थिक साझेदार के तौर पर देखते हैं। एफटीए लागू होने से भारत के करीब 1.5 अरब और यूरोप के 27 देशों के 50 करोड़ से अधिक लोगों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे।
किविकोस्की ने भारत-फिनलैंड आर्थिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का वर्तमान व्यापार करीब तीन अरब अमेरिकी डॉलर है। दोनों देशों ने 2030 तक इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फिनलैंड के नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय वार्ताओं में व्यापार को दोगुना करने से आगे बढ़कर अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने की जरूरत पर जोर दिया है। एफटीए को लेकर सकारात्मक माहौल के बीच फिनलैंड की नई और मध्यम आकार की कंपनियां भारतीय बाजार में निवेश, विनिर्माण और साझेदारी की संभावनाएं तलाश रही हैं। भारतीय कंपनियां भी फिनलैंड और नॉर्डिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में रुचि दिखा रही हैं।
भारत-फिनलैंड संबंधों में हाल के उच्चस्तरीय संपर्कों का जिक्र करते हुए राजदूत ने कहा कि उन्होंने 25 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना परिचय पत्र सौंपा है और करीब तीन महीने से भारत में राजनयिक दायित्व संभाल रहे हैं। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री और वाणिज्य मंत्री की फिनलैंड यात्राओं तथा गांधीनगर में आयोजित वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संपर्कों से दोनों देशों के बीच संधारणीयता, हरित ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गति मिली है।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर किविकोस्की ने कहा कि वर्ष 2020 में हुए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग समझौते के आधार पर दोनों देश सहयोग आगे बढ़ा रहे हैं। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में फिनलैंड की तकनीकी क्षमताएं भारत के लिए उपयोगी हो सकती हैं। उन्होंने नोकिया और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी आइसआई (आईसीईवाईई) की तकनीकों का जिक्र करते हुए कहा कि उपग्रह आधारित संचार और निगरानी प्रणालियां रक्षा, सीमा सुरक्षा, आपातकालीन संचार तथा आपदा प्रबंधन में उपयोगी हैं। फिनलैंड भारत के साथ तकनीक आधारित सह-विकास और सुरक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाना चाहता है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष और फिनलैंड के नाटो में शामिल होने के फैसले पर उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले फिनलैंड में करीब 70 प्रतिशत लोग नाटो सदस्यता के पक्ष में नहीं थे। फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद महज तीन दिनों में जनमत में बड़ा बदलाव आया और नाटो सदस्यता के समर्थन में लोगों की संख्या 75 से 80 प्रतिशत से अधिक हो गई। युद्ध के बाद रूस पर फिनलैंड का भरोसा पूरी तरह समाप्त हो गया और देश ने ऊर्जा, गैस तथा व्यापार समेत विभिन्न क्षेत्रों में रूस पर अपनी निर्भरता समाप्त कर दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संप्रभु देश को अपनी सुरक्षा और नागरिकों के हित में स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार है।
वैश्विक संघर्षों के समाधान में भारत की भूमिका की सराहना करते हुए फिनलैंड के राजदूत ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, सबसे अधिक आबादी वाला देश और ग्लोबल साउथ की महत्वपूर्ण आवाज है। यूक्रेन, पश्चिम एशिया और सूडान जैसे क्षेत्रों में जारी संघर्षों को समाप्त करने तथा शांति और स्थिरता कायम करने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन करते हुए भारत को स्थायी सदस्य बनाए जाने की वकालत की।
प्रौद्योगिकी सहयोग पर राजदूत ने कहा कि भारत और फिनलैंड 5जी, 6जी, क्वांटम कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। भारतीय दूरसंचार बुनियादी ढांचे में फिनिश तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और दोनों देश सुरक्षित डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास पर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहयोग को भविष्य में और व्यापक बनाया जा सकता है।
किविकोस्की ने फिनलैंड में भारतीय समुदाय के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 30 हजार से अधिक भारतीय नागरिक फिनलैंड में रह रहे हैं। इनमें करीब 2,000 से 3,000 छात्र हैं, जबकि बड़ी संख्या में भारतीय कुशल पेशेवर आईटी, सॉफ्टवेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिनलैंड भारत से और अधिक कुशल इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और तकनीकी पेशेवरों का स्वागत करने के लिए तैयार है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

