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भारत में पहली बार ग्लोबल साउथ में कृषि-सौर ऊर्जा पर विश्व सम्मेलन शुरू, 1200 से अधिक प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा

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भारत में पहली बार ग्लोबल साउथ में कृषि-सौर ऊर्जा पर विश्व सम्मेलन शुरू, 1200 से अधिक प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा


नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (हि.स.)। कृषि भूमि पर खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 7वां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन बुधवार को यहां भारत मंडपम में शुरू हुआ। तीन दिवसीय सम्मेलन में 1200 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 150 से ज्यादा विदेशी प्रतिभागी शामिल हैं। सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने, जलवायु अनुकूल खेती और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के उपायों पर चर्चा होगी।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय जर्मनी के पर्यावरण, जलवायु कार्रवाई, प्रकृति संरक्षण एवं परमाणु सुरक्षा मंत्रालय के सहयोग से यह सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इसका आयोजन कोनेक्सियो-पीएसई के साथ मिलकर किया जा रहा है। ‘ग्लोबल साउथ को ऊर्जा से सशक्त बनाना’ इसकी मुख्य विषयवस्तु है। पहली बार इस वैश्विक सम्मेलन का आयोजन ग्लोबल साउथ के किसी देश में हो रहा है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। जर्मनी के पर्यावरण मंत्री कार्स्टन श्नाइडर ने वीडियो संदेश दिया, जबकि भारत में जर्मनी और भूटान के राजदूत डॉ. जैस्पर विक ने समापन टिप्पणी की। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने स्वागत भाषण दिया। केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीपाद येसो नाइक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

सम्मेलन के दौरान तीन ज्ञान संसाधन जारी किए गए। इनमें इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स अलायंस का निर्णय सहायता उपकरण, अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान की शोध-सार पुस्तिका और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एग्रीपीवी नीति पुस्तिका शामिल हैं।

सम्मेलन में कृषि उत्पादकता, सौर तकनीक, वित्तपोषण, नीतिगत ढांचे, जलवायु अनुकूल खेती और किसानों के लिए टिकाऊ कारोबारी मॉडल पर चर्चा होगी। साथ ही स्टार्टअप और नवाचार मंच के तहत नई तकनीकों को प्रदर्शित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के नवाचारकर्ताओं, निवेशकों और उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाना है।

एग्रीवोल्टाइक्स में एक ही भूमि का उपयोग खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन, दोनों के लिए किया जाता है। इससे किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं। सम्मेलन में इस तकनीक के जरिए किसानों को ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनाने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि को बचाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर