आईसीएमआर ने उद्योग जगत को सौंपीं तीन स्वदेशी मेडिकल तकनीकें
नई दिल्ली, 11 मई (हि.स.)। 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस' के अवसर पर आयोजित ‘विज्ञान–टेक’ कार्यक्रम में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपनी तीन स्वदेशी मेडिकल तकनीकों का उद्योग जगत को हस्तांतरण किया। इनमें प्रोस्टेट बायोप्सी गाइडेंस के लिए किफायती पीएसपी94 एलीसा तकनीक, रक्त जमाव विकार की जांच के लिए प्वाइंट ऑफ केयर डायग्नोस्टिक तकनीक और डेंगू, चिकनगुनिया तथा जीका वायरस की पहचान के लिए सिंगल ट्यूब मल्टीप्लेक्स आरटी-पीसीआर तकनीक शामिल हैं।
इन तकनीकों को क्रमशः क्रिशजेन लैब प्रा.लि., मेरिल लाइफ साइंस और वैनगार्ड लाइफ साइंस को लाइसेंस किया गया।
ब्रिक– नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी में आयोजित कार्यक्रम में देश के 14 वैज्ञानिक, मंत्रालयों और विभागों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2014 में मात्र 350-400 स्टार्टअप से बढ़कर आज दो लाख से अधिक हो गया है, जिससे भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। भारत की ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंकिंग 80 से सुधरकर 38 हो गई है, जबकि देश आज पेटेंट के मामले में विश्व स्तर पर छठे स्थान पर है, जहां एक लाख से अधिक पेटेंट दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 55 प्रतिशत से अधिक भारतीय नागरिकों द्वारा दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत वैज्ञानिक प्रकाशनों और नवाचार-आधारित अनुसंधान में भी विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और विकसित भारत के लिए भारत के नवाचार इकोसिस्टम का निर्माण विषय पर आधारित इस दिनभर के कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रदर्शकों से बातचीत की।
इस दौरान भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल मौजूद रहे।
आईसीएमआर ने कार्यक्रम में बायोफार्मा, हेल्थ और ग्रीन केमिकल्स क्षेत्र से जुड़ी छह प्रमुख स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन किया। इनमें कोवैक्सीन, कोविड कवच एलीसा किट, क्रिसपर आधारित टीबी डिटेक्शन सिस्टम, निपाह प्वाइंट ऑफ केयर एसे, डेंगू डिटेक्शन एलिसा किट और मच्छर नियंत्रण के लिए बायोलार्विसाइड शामिल रहे। आईसीएमआर ने बताया कि यह पहल ‘मेक इन भारत’ और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में देशभर के शोध संस्थानों द्वारा विकसित 25 नवाचारों को भी राष्ट्रीय संकलन में शामिल किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

