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ईडी ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, फर्जी आईफोन निर्यात का मास्टरमाइंड बताया

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ईडी ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, फर्जी आईफोन निर्यात का मास्टरमाइंड बताया


गुरुग्राम, 10 जुलाई (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ कथित फर्जी मोबाइल निर्यात और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में गुरुग्राम की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। ईडी ने चार्जशीट में अरोड़ा को कथित फर्जी निर्यात नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताते हुए उन पर लगभग 103 करोड़ रुपये के फर्जी आईफोन निर्यात के जरिए सरकारी लाभ और रिफंड हासिल करने का आरोप लगाया है।

ईडी की जांच के मुताबिक, संजीव अरोड़ा ने एक भी आईफोन दुबई नहीं भेजा। करीब 44 हजार मोबाइल फोन का निर्यात सिर्फ कागजों पर दिखाया गया। इसके लिए फर्जी खरीद बिल, फर्जी निर्यात दस्तावेज और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इस फर्जीवाड़े का मकसद निर्यात प्रोत्साहन का लाभ लेना और काले धन को सफेद करना था। अब तक इस मामले में अरोड़ा की 55 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की जा चुकी है।

ईडी की ओर से अदालत में मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ दायर की गई चार्जशीट में तीन बड़े खुलासे भी हुए हैं। इनमें पहला खुलासा 150 करोड़ रुपये का दिखावटी कारोबार है। आईफोन की कथित बिक्री का कुल टर्नओवर 150 करोड़ रुपये से अधिक का दिखाया गया। दूसरा खुलासा है कि दुबई की कंपनी खुद के बिजनेस में निवेशक दिखाई गई है। 100 करोड़ से ज्यादा के आईफोन दुबई की एक कंपनी को भेजने की बात कही गई। जांच में यह सामने आया कि वही कंपनी मंत्री संजीव अरोड़ा की रियल एस्टेट फर्म में निवेशक भी है। तीसरा खुलासा यह है कि आईफोन खरीद दिखाने वाली कई कंपनियां शेल और अस्तित्व में ही नहीं हैं। इन कंपनियों ने बिना कोई सामान दिए फर्जी इनवायस दे दिए।

ईडी की ओर से कहा गया है कि शेल कंपनियां, काल्पनिक खरीदारों और सर्कुलर फंडिंग से फर्जी एक्सपोर्ट नेटवर्क तैयार किया गया। नकली कागजों के आधार पर दुबई में आईफोन की खेप भेजी गई। सरकारी रिफंड में 16 करोड़ की हेराफेरी का भी आरोप है। इसमें 87 करोड़ रुपये एक्सपोर्ट रेमिटेंस और 16 करोड़ रुपये आईजीएसटी व ड्यूटी ड्रा बैक रिफंड शामिल है। ईडी की ओर से चार्ज शीट में यह भी कहा गया है कि जिस आईसीआईसीआई बैंक के खाते में एक्सपोर्ट के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए, उसके हस्ताक्षरकर्ता संजीव अरोड़ा ही थे। यानी वे खुद ही साइनिंग अथॉरिटी थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर