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राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गुणवत्ता जांच के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोबाइल क्वालिटी कंट्रोल वैन शुरू की

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राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गुणवत्ता जांच के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोबाइल क्वालिटी कंट्रोल वैन शुरू की


नई दिल्ली, 23 फरवरी (हि.स.)। देश में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोबाइल क्वालिटी कंट्रोल वैन (एमक्यूसीवी) की शुरुआत की है। इस पायलट परियोजना को राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और ओडिशा में लागू किया गया है। इसका उद्देश्य निर्माण कार्य की गुणवत्ता की मौके पर ही जांच करना है।

मंत्रालय ने बताया कि मोबाइल क्वालिटी कंट्रोल वैन चलती-फिरती प्रयोगशाला की तरह काम करती है। इसमें ऐसे आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनसे बिना निर्माण कार्य को नुकसान पहुंचाए गुणवत्ता की जांच की जा सकती है। इससे निर्माण की मजबूती, टिकाऊपन और सुरक्षा का आकलन किया जा सकेगा। इन वैन में रिबाउंड हैमर लगाया गया है। यह उपकरण कंक्रीट की सतह की कठोरता और मजबूती की जांच करता है। इससे यह पता चलता है कि निर्माण मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं। इसके अलावा अल्ट्रासोनिक पल्स वेग मीटर भी लगाया गया है। यह उपकरण कंक्रीट के अंदर ध्वनि तरंग भेजकर दरार, खाली स्थान और अन्य खामियों का पता लगाता है। इससे छिपी हुई कमजोरियों की पहचान संभव होती है। वैन में एस्फाल्ट घनत्व मापक भी लगाया गया है। यह उपकरण सड़क की परत की सघनता की जांच करता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहे।

इसी तरह हल्का विक्षेप मापक भी इसमें शामिल है। यह मिट्टी और आधार परत की मजबूती का आकलन करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सड़क का आधार मजबूत है।

मंत्रालय ने बताया कि वैन में रिफ्लेक्टोमीटर भी लगाया गया है। यह सड़क संकेत और मार्किंग की दृश्यता की जांच करता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सड़क संकेत दिन और रात दोनों समय स्पष्ट दिखाई दें। इन वैन से प्राप्त जांच रिपोर्ट संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजी जाएगी। यदि किसी स्थान पर गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

मंत्रालय ने बताया कि इस परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग गुणवत्ता निगरानी पोर्टल भी विकसित किया जा रहा है। इस पोर्टल पर जांच रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इससे गुणवत्ता जांच की निगरानी पारदर्शी और वास्तविक समय में संभव होगी। इस पोर्टल के माध्यम से मोबाइल वैन की जीपीएस के जरिए निगरानी भी की जा सकेगी। इस परियोजना के अगले चरण में इसे 11 और राज्यों में लागू किया जाएगा। इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और मेघालय शामिल हैं। अगले चरण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन वैन को जून, 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर