प्रोटीन को लेकर बढ़ रही जागरूकता, लेकिन कम सेवन अभी भी बड़ी चुनौती: सर्वे
नई दिल्ली, 06 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय उपभोक्ता अब न्यूट्रिशन यानी पोषण पर पहले से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन इस जागरूकता से लोगों के खान-पान पर बहुत ज्यादा असर नहीं दिखने को मिल रहा है। यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च (आईआईएमआर) के साथ मिलकर किए गए पेप्सिको इंडिया के नए अध्ययन में यह तस्वीर सामने आई है।
पेप्सिको इंडिया एवं यूरोमॉनिटर ने मंगलवार को जारी अपने अध्ययन रिपोर्ट में बताया कि लोग प्रोटीन, फाइबर और ओट्स के बारे में क्या सोचते हैं तथा बेहतर न्यूट्रिशन को ज्यादा व्यावहारिक एवं सुगम बनाने के लिए क्या किया जा सकता है। 'शहरी भारत में प्रोटीन एवं फाइबर की स्थिति' शीर्षक से जारी किए गए है।
इस अध्ययन में देश की राजधानी नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता एवं कोच्चि के 18-50 साल की उम्र के 1,250 लोगों को शामिल किया गया था। इसमें प्रोटीन एवं फाइबर को लेकर जागरूकता एवं इनटेक, लाइफस्टाइल एवं नाश्ते से संबंधित आदतों, खान-पान को प्रभावित करने वाले कारकों, ओट्स के बारे में उनकी अवधारणा और संपूर्ण स्वास्थ्य के बारे में जानकारी जुटाई गई।
अध्ययन के कुछ प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:-
जागरूकता का मतलब हमेशा समझदारी नहीं होती:- 74 फीसदी उपभोक्ताओं ने दावा किया कि उन्हें प्रोटीन की रोजाना की जरूरत के बारे में पता है, लेकिन इनमें से 56 फीसदी को गलत जानकारी थी। प्रोटीन की रोजाना की जरूरत के बारे में या तो उन्हें जानकारी नहीं थी, इस बारे में अनिश्चितता थी या फिर इसकी सही मात्रा के बारे में उन्हें नहीं पता था।
थाली में प्रोटीन की कमी:- सर्वेक्षण में शामिल 70 फीसदी लोग रोजाना 41 ग्राम से भी कम प्रोटीन का सेवन करते हैं, जो अनुशंसित मात्रा (रिकमेंडेड इनटेक लेवल) से काफी कम है। प्रोटीन के सेवन में यह कमी सर्वेक्षण में शामिल सभी पांचों शहरों में देखी गई।
फाइबर को लेकर जानकारी की कमी और भी व्यापक:-59 फीसदी लोगों ने दावा किया कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि उनके लिए रोजाना कितना फाइबर जरूरी है, लेकिन 89 फीसदी लोगों की जानकारी इसके बारे में गलत है। केवल 11 फीसदी लोग ही सही मात्रा के बारे में जानते हैं।
सभी शहरों एवं पीढ़ियों में फाइबर का सेवन अनुशंसित स्तर से कम:- 61 फीसदी लोग रोजाना अनुशंसित स्तर से कम फाइबर का सेवन करते हैं। जेन एक्स में ऐसे लोग 65 फीसदी हैं, जबकि जेन जी और मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 58 फीसदी है।
उपभोक्ता चाहते हैं कि प्रोटीन स्वाभाविक रूप से उनके खान-पान में शामिल हो:- सभी पीढ़ियों के लगभग 10 में से 9 उपभोक्ता चाहते हैं कि आहार में प्रोटीन को शामिल करना अधिक आसान और सहज हो, जबकि 89% लोग चाहते हैं कि प्रोटीन आसानी से पहचान में आने वाले और रोजमर्रा के खाने की वस्तु के रूप में उपलब्ध हो।
कीमत और सहूलियत हैं प्रोटीन के सेवन में सबसे बड़ी बाधाएं:- 60 फीसदी लोगों ने अधिक कीमत को, जबकि 57 फीसदी ने सुविधाजनक एवं भरोसेमंद प्रोटीन-युक्त खाद्य विकल्पों की कमी को प्रोटीन सेवन की राह में बड़ी अड़चन माना।
फाइबर के मामले में सही विकल्पों तक पहुंच है बड़ी बाधा:- 69 फीसदी लोगों का कहना है कि सुविधाजनक और भरोसेमंद फाइबर वाले खाद्य विकल्पों की कमी है। यह आंकड़ा कोच्चि में 74 फीसदी, कोलकाता में 72 फीसदी और मुंबई में 71 फीसदी तक पहुंच जाता है।
अध्ययन के निष्कर्षों को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से आयोजित एक कार्यक्रम में जारी किया गया। इसमें पोषण, जन स्वास्थ्य और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर हुई चर्चा में पोषण को लेकर जागरूकता और वास्तविक सेवन के बीच के अंतर तथा बेहतर पोषण को अधिक सुलभ, सरल एवं रोजमर्रा के आहार में आसानी से शामिल करने योग्य बनाने की जरूरत पर विचार किया गया।
अध्ययन के निष्कर्षों को जारी करने के अवसर पर पेप्सिको इंडिया की डायरेक्टर, आरएंडडी लाइफसाइंस एवं इंडिया आरएंडडी साइट लीड, डॉ. अंकिता मारवाह ने कहा, “स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली के बारे में उपभोक्ताओं की सोच में पोषण की भूमिका बढ़ती जा रही है और ऐसे में केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है।
महत्वपूर्ण यह है कि पोषण के बारे में लोगों के पास जो विश्वसनीय जानकारी है, उसे रोजमर्रा के व्यावहारिक विकल्पों में बदलने में उन्हें मदद की जाए। पेप्सिको इंडिया में उपभोक्ताओं के करीब रहना और यह समझना हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि उनकी जरूरतों और व्यवहार में किस तरह बदलाव आ रहे हैं।
हम पोषण के बारे में अपनी समझ को और गहरा करने तथा बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने के तरीकों का पता लगाने के लिए शोध एवं अकादमिक समुदाय के साथ भी लगातार काम कर रहे हैं, ताकि उपभोक्ता पूरी जानकारी के साथ सही निर्णय ले सकें।
यह अध्ययन भी इसी दिशा में एक कदम है, जो प्रोटीन और फाइबर को लेकर जागरूकता, समझ और व्यवहार के बीच महत्वपूर्ण अंतर को सामने लाता है और हमें उन वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है, जिनसे रोजमर्रा के खान-पान के विकल्प प्रभावित होते हैं।”
उल्लेखनीय है कि 145 वर्षों से अधिक की वैश्विक विरासत और 2006 से भारत में अपनी मौजूदगी के साथ क्वेकर पेप्सिको फूड्स के पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। दुनिया के नंबर 1 ओट्स ब्रांड¹ के रूप में क्वेकर, ओट्स एवं न्यूट्रिशन के मामले में अपनी विशेषज्ञता के आधार पर पोषण के क्षेत्र में व्यापक भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें प्रोटीन और फाइबर पर फोकस बढ़ाया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

