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राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र का औचक निरीक्षण, शिवराज सिंह ने कमियों पर जताई नाराजगी

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राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र का औचक निरीक्षण, शिवराज सिंह ने कमियों पर जताई नाराजगी


नई दिल्ली, 15 मई (हि.स.)। अंगूर उत्पादक किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए बने आईसीएआर के राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र, पुणे का शुक्रवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आकस्मिक निरीक्षण किया। केंद्रीय मंत्री शिवराज के इस औचक निरीक्षण में राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र की पोल खुल गई। मंत्री ने देखा कि वहां नर्सरी फेल है, इसकी वैरायटी बेअसर है और क्लीन प्लांट सेंटर का काम भी धीमा है, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि अंगूर किसानों के नाम पर सुस्ती बिल्कुल नहीं चलेगी।

शिवराज सिंह ने संस्थान के निदेशक डॉ. कौशिक बनर्जी से जवाब मांगा। इस दौरान किसानों की शिकायतें भी सामने आईं और संस्थान की कार्यप्रणाली के कई पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए। केंद्रीय मंत्री शिवराज का पूरा रुख स्पष्ट था कि किसानों के नाम पर चल रही कोई भी व्यवस्था अगर परिणाम नहीं दे रही है, तो उसकी जवाबदेही तय होगी।

इस मौके पर शिवराज चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान एक बहुत महत्वपूर्ण संस्थान है क्योंकि अंगूर हमारी कमर्शियल क्रॉप है और महाराष्ट्र में देश का 80 प्रतिशत अंगूर होता है। उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र जैसा राज्य देश के अंगूर उत्पादन की रीढ़ बना हुआ है, तब इस संस्थान की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, लेकिन मौजूदा चुनौतियों के हिसाब से संस्थान की तैयारी और कार्यकुशलता अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दी।

किसानों के सामने बढ़ रही मुश्किलों का जिक्र करते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि अंगूर उत्पादक किसानों के सामने जो समस्याएँ आज आ रही हैं- क्लाइमेट चेंज, जलवायु परिवर्तन, ज्यादा बरसात, उसके कारण अंगूर की फसल को काफी नुकसान हो रहा है। अलग-अलग तरह के वायरस का अटैक, उन परिस्थितियों में संस्थान को क्या काम करना चाहिए किसानों के लिए, उस पर व्यापक पैमाने पर चर्चा हुई है।

शिवराज सिंह ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यहा का काम संतोषजनक नहीं लगा। किसानों की शिकायत थी कि संस्थान से अपेक्षित स्तर का मार्गदर्शन नहीं मिलता, तैयार की जा रही किस्में व्यवहारिक लाभ नहीं दे रहीं और सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कम होने के कारण उन्हें निजी नर्सरियों और निजी स्रोतों की ओर रुख करना पड़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज ने समीक्षा के बाद साफ कहा कि सरकार किसानों के हित में काम करती है और हर व्यवस्था को उसी कसौटी पर परखा जाएगा। राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान से अपेक्षा थी कि वह जलवायु परिवर्तन, असामान्य वर्षा, वायरस हमलों और निर्यात प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों के दौर में अंगूर किसानों के लिए समाधान का केंद्र बनेगा, लेकिन नर्सरी में अव्यवस्था, किस्मों की सीमित स्वीकार्यता, क्लीन प्लांट सेंटर की धीमी प्रगति और किसानों की शिकायतों ने यह संकेत दिया है कि संस्थान को अपनी दिशा, कार्यगति और जवाबदेही तीनों पर गंभीर आत्ममंथन करना होगा।

शिवराज सिंह चौहान का यह दौरा इसी मायने में महत्वपूर्ण है कि उन्होंने संस्थान की चमकदार सतह के पीछे छिपी कमजोरियों को सामने लाया और स्पष्ट किया कि किसानों के नाम पर सुस्त व्यवस्था अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी