ईरानी कच्चे तेल के कार्गो के चीन डायवर्ट किए जाने की खबरें तथ्यात्मक रूप से गलतः सरकार
नई दिल्ली, 04 अप्रैल (हि.स)। केंद्र सरकार ने ईरानी कच्चे तेल के एक कार्गो को पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों के कारण गुजरात के वाडिनार से चीन की ओर मोड़ दिए जाने की खबरों को तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक बताते हुए खारिज किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को एक्स पोस्ट में उन हालिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों के कारण ईरान से आने वाले कच्चे तेल की एक खेप को भारत के बजाय चीन भेज दिया गया था। मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और भरोसा दिलाया कि देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है।
मंत्रालय ने बताया, “ईरानी कच्चे तेल के एक कार्गो को ‘पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों’ के कारण भारत के वाडिनार से चीन की ओर मोड़े जाने की खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।” मंत्रालय ने कहा कि ईरान में चल रहे युद्ध के बीच पश्चिम एशिया में पैदा हुई रुकावटों के बावजूद भारतीय रिफाइनरों ने ईरान से होने वाली सप्लाई समेत अपनी कच्चे तेल की जरूरतें पहले ही पूरी कर ली हैं।
कच्चे तेल के व्यापार में जहाजों का मार्ग बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है। समुद्र में जा रहे कार्गो अक्सर व्यापार अनुकूलन और परिचालन लचीलेपन के आधार पर बीच यात्रा में अपना गंतव्य बदल लेते हैं। मंत्रालय ने बताया कि ईरान में चल रहे युद्ध के बीच पश्चिम एशिया में पैदा हुई बाधाओं के बावजूद भारतीय रिफाइनरों ने अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतें पहले ही पूरी कर ली हैं, जिसमें ईरान से होने वाली आपूर्ति भी शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के आयात में पेमेंट को लेकर कोई रुकावट नहीं है, जैसा कि अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं। मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत 40 से ज़्यादा देशों से कच्चा तेल लेता है और कंपनियों के पास कमर्शियल ज़रूरतों के हिसाब से सोर्सिंग में बदलाव करने की पूरी आजादी है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण इस हफ्ते की शुरुआत में आई उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर 'पिंग शुन', जो ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा था, इसने पहले भारत के वडीनार बंदरगाह को अपना गंतव्य बताया था, लेकिन बाद में चीन की ओर अपना रास्ता बदल लिया।
इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्रालय ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की सप्लाई से जुड़ी चिंताओं पर भी बात की और कुछ दावों को गलत बताया। मंत्रालय ने बताया कि एलपीजी जहाज 'सी बर्ड', जिसमें लगभग 44,000 टन ईरानी एलपीजी लदी है, 2 अप्रैल को मैंगलोर पहुंचा और अभी माल उतार रहा है।
उल्लेखनीय है कि कच्चे तेल बाजार पर नजर रखने वाली एजेंसी केप्लर ने दावा किया था कि ईरान से लगभग 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा एक जहाज अचानक अपना मार्ग बदलकर चीन की दिशा में बढ़ गया। यह जहाज, जिसका नाम 'पिंग शुन' है, गुरुवार रात तक अरब सागर में भारत के रास्ते पर था और इसके गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन मंजिल के करीब पहुंचने से ठीक पहले इसने अपनी दिशा बदल दी। एजेंसी ने कहा था कि जहाज ने अब अपने घोषित गंतव्य भारत से बदलकर चीन की ओर संकेत देना शुरू कर दिया है, जिससे इस अचानक बदलाव को लेकर सवाल खड़े हो गए थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

