ग्लोबल हीलिंग का नया पता है भारत : मेडिकल टूरिज्म से अर्थव्यवस्था को मिल रही नई रफ्तार
-डॉ. मयंक चतुर्वेदी
नई दिल्ली, 06 अगस्त (हि.स.)। दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, लंबी प्रतीक्षा अवधि और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता बोझ लोगों को बेहतर और किफायती इलाज की तलाश में विदेश जाने के लिए प्रेरित कर रहा है। वस्तुत: इसी वैश्विक बदलाव के बीच भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटी) का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है।
दरअसल, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, उच्च प्रशिक्षित डॉक्टरों और आयुष आधारित पारंपरिक उपचार प्रणालियों के अनूठे संगम ने भारत को वैश्विक मरीजों की पहली पसंद बना दिया है। इसके साथ ही यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। यदि आंकड़ों की बात करें तो मेडिकल वैल्यू ट्रैवल आज एक बहु-अरब डॉलर का उद्योग बन चुका है। वर्ष 2022 में इसका वैश्विक बाजार 115.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 286.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह लगभग 10.8 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) को दर्शाता है।
केंद्र सरकार से प्राप्त आंकड़े बता रहे हैं कि भारत भी इस विकास यात्रा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2025 में भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार लगभग 8.7 बिलियन डॉलर का आंका गया, जोकि 2030 तक 16.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाने की प्रबल संभावना है। पिछले वर्ष 2025 के आंकड़े भारत की बढ़ती लोकप्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं, क्योंकि विदेशी पर्यटक आगमन (एफटीए): 9.15 मिलियन को यदि देखें तो चिकित्सा उद्देश्य से आए पर्यटक 5,07,244 की संख्या में सामने आए हैं।
यानी कि एफटीए में हिस्सेदारी उनकी लगभग 5.5 प्रतिशत तक रही है। भारत में मरीज मुख्य रूप से हृदय शल्य चिकित्सा, आर्थोपेडिक उपचार, कैंसर थेरेपी, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरोलॉजिकल उपचार, कॉस्मेटिक सर्जरी, दंत चिकित्सा और प्रजनन उपचार के लिए आते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं (मेडिकल टूरिज्म) लेने के लिए विश्व के करीब 176 देशों से लोग भारत आ रहे हैं। चिकित्सा पर्यटन के लिए भारत आने वाले प्रमुख देशों में बांग्लादेश (3,25,127), इराक (30,989), उज्बेकिस्तान (13,699), सोमालिया (11,506), तुर्कमेनिस्तान (10,231), ओमान (9738) और केन्या (9,357) शामिल हैं। इनके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों से भी बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए भारत का रुख कर रहे हैं।
इस संबंध में मध्य प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के डॉ. दीपक रघुवंशी कहते हैं, भारत सदियों से उपचार और संतुलन की भूमि रहा है। ऋषि भारद्वाज से आरंभ हुई चिकित्सकीय परंपरा आज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ मिलकर एक सशक्त मेडिकल वैल्यू ट्रैवल इकोसिस्टम का निर्माण कर रही है, इसलिए यहां मरीजों को संपूर्ण स्वास्थ्य समाधान मिलता है। यही वजह है कि दुनिया भर के मरीज भारत को प्राथमिकता दे रहे हैं।
डॉ. रघुवंशी बताते हैं कि भारत में आयुर्वेद के प्रति लाेगाें का लगातार भराेसा बढ़ रहा है। यह विश्वास और भराेसा बताता है कि देश के लाेगाें में अपनी प्राचीन इलाज पद्धति के प्रति लगाव वापस लाैट रहा है। देश में आयुर्वेंद का निरंतर बढ़ता काराेबार और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए)की स्थापना, शहर-शहर बनते अस्पताल और क्लीनिक इसी ओर इशारा करते हैं।एआईआईए में नित्य प्रति हजाराें मरीजाें का पंजीयन आयुर्वेद के प्रति लाेगाें के विश्वास काे दिखाता और बताता है।
वे कहते हैं, “यह इकोसिस्टम दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, मेडिकल टूरिज्म- जिसमें हम जटिल सर्जरी, अंग प्रत्यारोपण, कैंसर उपचार और उन्नत चिकित्सा सेवाओं को ले सकते हैं, दूसरा- वेलनेस टूरिज्म, जिसमें कि योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य आयुष पद्धतियों पर आधारित निवारक स्वास्थ्य है। आप देख सकते हैं कि दोनों ही क्षेत्रों में भारत आज अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। फिर ये विकसित देशों से तुलनात्मक रूप से बहुत सस्ता भी है, कुल मिलाकर भारत आकर स्वास्थ्य सेवाओं को लेने का अर्थ है, स्वास्थ्य संरक्षण के साथ धन की बचत। यही कारण है जो आज भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटी) का एक मजबूत केंद्र बन गया है।”
केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद की साइंटिफिक एडवाइजरी कमेटी सदस्य, भारत सरकार में समस्त अनुसंधान की नॉडल अधिकारी, शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा कॉलेज भोपाल में व्याख्याता डॉ. जूही गुप्ता के अनुसार, भारत में चिकित्सा और वेलनेस का यह दोहरा मॉडल वैश्विक स्तर पर अनूठा है। यह बीमारी के इलाज के साथ-साथ जीवनशैली को भी सुधारने पर जोर दिया जाता है। भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, आयुर्वेद और होम्योपैथी स्वास्थ्य पर्यटन को एक नया आयाम देती हैं।
डॉ. जूही गुप्ता कहती हैं, “होम्योपैथी में आज भारत विश्व का लीडर है। यह मनोविज्ञान पर कार्य करते हुए शरीर को ठीक कर देनेवाली चिकित्सा है। निश्चित ही यह पद्धति भले ही जर्मनी से आई हो, लेकिन आज हर बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए यदि सफल हुई है तो उसके पीछे भारत में हो रहे होम्योपैथ के अनेक नवीनतम अनुसंधान हैं, इसलिए आज कई देशों से लोग यहां अपना इलाज कराने आ रहे हैं, देश में भी लगातार होम्योपैथ लेने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है।”
डॉ. विनीत चतुर्वेदी कहते हैं, भारत की स्वास्थ्य सेवाएं लागत और गुणवत्ता दोनों के लिहाज से संतुलित हैं। यही इसे अन्य देशों से अलग बनाता है। फिर वहीं यह भी सच है कि आज भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली दुनिया के सबसे बड़े प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों के समूह में से एक पर आधारित है। लगभग 69,364 अस्पताल (43,486 निजी, 25,778 सरकारी) हैं। 1.2 मिलियन से अधिक पंजीकृत चिकित्सक हैं।
इसके अलावा डॉ. विनीत कहते हैं, अस्पतालों को राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) से मान्यता मिलती है, जो 600 से अधिक सुरक्षा मानकों के आधार पर गुणवत्ता सुनिश्चित करता है। 2026 तक 1,299 से अधिक अस्पताल एनएबीएच से प्रमाणित हो चुके हैं। कई अस्पतालों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जेसीआई प्रमाणन भी मिला हुआ है, जो उन्हें वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाता है।
आयुष: भारत की वैश्विक पहचान और सॉफ्ट पावर
सरकार ने 27 जुलाई 2023 को आयुष वीजा शुरू कर अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए भारत आना आसान बना दिया है। इसके साथ ही आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज बढ़ा है। आज भारत में 27 बीमा कंपनियां 140 से अधिक पॉलिसी दे रही हैं। वहीं आईएसओ 22525 जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया गया है।
चिकित्सा क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रहा संगठन आरोग्य भारती के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मिहिर कुमार झा कहते हैं, आयुष भारत की सॉफ्ट पावर है। यह प्रत्येक मनुष्य को सिर्फ शारीरिक रूप से ही स्वस्थ रखे, यह तो इसके साथ बिल्कुल नहीं है, जब आप आयुष के माध्यम से अपने जीवन को स्वस्थ रखने के लिए आगे आते हैं, तब वास्तव में आप अपने लिए समग्रता से विचार कर रहे होते हैं, क्योंकि आयुष संपूर्ण जीवन के सही स्वास्थ्य के लिए जीवनशैली में वास्तविक बदलाव का माध्यम है।”
उन्होंने कहा, “भारत सरकार मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए व्यापक योजना पर काम कर रही है। बजट 2026-27 में पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र बनाने का प्रस्ताव है, जहां एक ही स्थान पर इलाज, शिक्षा और रिसर्च सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसी तरह से डिजिटल सुविधा और वीजा सुधार पर देश में बड़ा कार्य इन दिनों होता हुआ देखा जा सकता है। ई-मेडिकल वीजा (172 देशों के लिए), ई-आयुष वीजा, वन-स्टॉप मेडिकल वैल्यू ट्रैवल पोर्टल, एयरपोर्ट सुविधा, एमवीटी कंसीयज सेवाएं, विशेष लाउंज और सहायता केंद्र जैसे अनेक कार्य हैं जो देश भर में इस दिशा में हो रहे हैं।
अर्थव्यवस्था और रोजगार में बड़ा योगदान
अब हम इससे संबंधित भारत सरकार के आंकड़ों पर गौर करें तो मेडिकल टूरिज्म भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है। जिसमें कि 2024 में पर्यटन क्षेत्र का ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) में योगदान: 5.22 फीसद रहा, जिससे कि कुल रोजगार: 8.46 करोड़ (लगभग 13.3प्रतिशत) सृजित हो सके। कहना होगा कि यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा अर्जन, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा रहा है।
योग और वेलनेस: भारत की वैश्विक ब्रांडिंग
योग आज भारत की वैश्विक पहचान बन चुका है। “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” जैसे विषयों के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने इसे वैश्विक स्तर पर और मजबूत किया है। यह न सिर्फ वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी दुनिया तक पहुंचाता है।
भारत ने मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म के लिए मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार किया है, राष्ट्रीय चिकित्सा एवं वेलनेस पर्यटन संवर्धन बोर्ड (एनएमडब्ल्यूटीबी), राज्य स्तर पर समर्पित बोर्ड, एमवीटी फैसिलिटेटर्स का पंजीकरण और रेटिंग, इसके साथ ही 10,000 गाइडों को प्रशिक्षित करने और स्वास्थ्य कर्मियों को विदेशी भाषाओं में दक्ष बनाने की योजना भी लागू की जा रही है।
भारत तेजी से एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक उपचार मिलकर समग्र स्वास्थ्य समाधान प्रदान करते हैं। बढ़ती वैश्विक मांग, मजबूत नीतिगत समर्थन, डिजिटल सुविधाएं और आयुष की बढ़ती स्वीकार्यता भारत को आने वाले समय में हेल्थकेयर सुपरपावर बना सकती है।
इन चिकित्सालयों में आते हैं, सबसे अधिक विदेशी
भारत के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स, नई दिल्ली एवं अन्य), आईएलबीएस (नई दिल्ली), टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (मुंबई) और पीजीआईएमईआर (चंडीगढ़) जैसे शीर्ष सरकारी अस्पतालों में भी विदेशी मरीज बड़ी संख्या में इलाज के लिए आ रहे हैं। मुख्य रूप से नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और कई अफ्रीकी देशों के मरीज यहाँ कैंसर, लिवर ट्रांसप्लांट और न्यूरोसर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पहुँचते हैं। संस्थान जैसे भी अपनी उच्च विशेषज्ञता और बेहद किफायती खर्च के कारण विदेशी मरीजों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
हालांकि, भारतीय मरीजों की भारी भीड़ और लंबे वेटिंग पीरियड के कारण विदेशी मरीज निजी अस्पतालों को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, लेकिन शीर्ष सरकारी डॉक्टरों की विश्वसनीयता के चलते सरकार अब 'हीअल इन इंडिया' मिशन के तहत इन संस्थानों में विदेशी नागरिकों के लिए पंजीकरण व्यवस्था को और आसान बना रही है।वहीं, जिन निजी चिकित्सालयों में मरीज आ रहे हैं, उनमें अपोलो हॉस्पिटल्स (चेन्नई और दिल्ली) सबसे बड़ा नेटवर्क है जहाँ 140 से अधिक देशों से लोग लिवर/किडनी ट्रांसप्लांट और प्रोटॉन कैंसर थेरेपी के लिए आते हैं।
इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में स्थित मेदांता-द मेडिसिटी और फोर्टिस हेल्थकेयर (गुरुग्राम) अपनी रोबोटिक कार्डियक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी और एडवांस बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हैं। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (साकेत) और बीएलके-मैक्स (नई दिल्ली) भी रीढ़ की हड्डी के इलाज और एशिया के सबसे बड़े बोन मैरो ट्रांसप्लांट केंद्रों में से एक होने के कारण इराक व उज्बेकिस्तान जैसे देशों के मरीजों की पहली पसंद हैं।
दक्षिण और पश्चिमी भारत की बात करें तो बेंगलुरु का नारायणा हेल्थ अपनी बेहद किफायती ओपन हार्ट सर्जरी के लिए जाना जाता है, जबकि मुंबई का कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल और हैदराबाद का यशोधो हॉस्पिटल्स हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट व न्यूरोसर्जरी के बड़े वैश्विक केंद्र बन चुके हैं। चेन्नई के एमआईओटी इंटरनेशनल व ग्लेनेगल्स हेल्थ सिटी, दिल्ली के ऐतिहासिक सर गंगा राम अस्पताल, मणिपाल हॉस्पिटल्स नेटवर्क और फरीदाबाद स्थित एशिया के विशाल अमृता अस्पताल में हर साल अफ्रीका, मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के 130 से अधिक देशों से हजारों विदेशी मरीज उन्नत चिकित्सा तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय बीमा गठजोड के चलते भारत इलाज कराने पहुँच रहे हैं।
इस तरह से यदि देखें तो भारत का मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म सेक्टर वर्तमान भारत में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रहा है और एक तरीके से देश की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। आज दिनोंदिन भारत अपने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संतुलन को बनाए रखते हुए उच्च गुणवत्ता के साथ किफायती इलाज दे रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप हम कह सकते हैं कि भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद स्वास्थ्य केंद्र बन गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

