उन्नत सेल और जीन थेरेपी के लिए सरकार ने ड्रग्स नियमों में किया संशोधन
नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स.)। केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए सेल या स्टेम सेल-आधारित उत्पादों, जीन थेरेपी उत्पादों और ज़ेनोग्राफ्ट को केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण(सीएलएए) के दायरे में शामिल कर दिया है। इसका उद्देश्य इन उन्नत चिकित्सा तकनीकों के लिए पूरे देश में एक समान और सख्त नियामक व्यवस्था सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ये उपचार अत्यधिक जटिल, विशेषीकृत और तेजी से विकसित होने वाली चिकित्सा तकनीकें हैं। इसलिए मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन पर अधिक कड़ी नियामक निगरानी आवश्यक है।
गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि नियमों में संशोधन से उन्नत चिकित्सा तकनीकों के लिए नियामक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। इसके साथ मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी तथा स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान क्षेत्र में नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
इस संशोधन से अब सीएलएए के तहत सेल या स्टेम सेल-आधारित उत्पाद
जीन थेरेपी उत्पाद
, ज़ेनोग्राफ्ट (पशु ऊतकों से बने प्रत्यारोपण योग्य उत्पाद)आएंगे। उल्लेखनीय है कि स्टेम सेल आधारित उपचार और सीएआर-टी सेल थेरेपी का उपयोग ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में किया जाता है। वहीं, जीन थेरेपी का इस्तेमाल आनुवंशिक बीमारियों और कुछ प्रकार के कैंसर के उपचार में हो रहा है। ज़ेनोग्राफ्ट, यानी पशु ऊतकों से बने प्रत्यारोपण योग्य उत्पाद, हृदय और हड्डी संबंधी उपचारों में उपयोग किए जाते हैं।
इस संशोधन से मरीजों की सुरक्षा और नियामक मानकों को और मजबूत किया जाएगा, साथ ही स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

