home page

तेलंगाना का लोकपर्व ‘बोनालु’ शुरू, गोलकोंडा किले में उमड़ा आस्था का सैलाब, देवी महाकाली को अर्पित किया गया नैवेद्य

 | 
तेलंगाना का लोकपर्व ‘बोनालु’ शुरू, गोलकोंडा किले में उमड़ा आस्था का सैलाब, देवी महाकाली को अर्पित किया गया नैवेद्य


हैदराबाद, 16 जुलाई (हि.स.)। तेलंगाना का प्रसिद्ध लोक एवं धार्मिक पर्व ‘बोनालु’** गुरुवार को पारंपरिक श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ शुरू हो गया। महीने भर चलने वाले इस महापर्व के प्रथम दिन हजारों श्रद्धालु हैदराबाद स्थित ऐतिहासिक गोलकोंडा किले में एकत्र हुए और पहाड़ी पर स्थित देवी जगदंबा महाकाली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर नैवेद्य अर्पित किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, लोक परंपरा और सांस्कृतिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व आषाढ़ मास के प्रथम गुरुवार से आरंभ होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में मिट्टी के कलशों और बर्तनों में विशेष प्रसाद एवं भोजन लेकर देवी के दरबार में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने देवी महाकाली से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना की।

उत्सव का मुख्य जुलूस लंगर हाउस के समीप स्थित छोटे मंदिर से आरंभ हुआ, जहां से श्रद्धालु लगभग 800 मीटर की यात्रा करते हुए गोलकोंडा किले के मुख्य द्वार और वहां से पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचे। जुलूस में पारंपरिक पुजारी ‘पोथाराजू’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मंत्रोच्चार, देवी की जय-जयकार और पारंपरिक नगाड़ों की गूंज के बीच पोथाराजू ने धार्मिक अनुष्ठानों का नेतृत्व किया। कई पोथाराजू पारंपरिक शैली में कोड़े घुमाते और तलवारबाजी का प्रदर्शन करते हुए श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाते नजर आए।

रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे पुरुष, महिलाएं और बच्चे नृत्य एवं भक्ति गीतों के साथ देवी के जयकारे लगाते हुए मंदिर पहुंचे। पूरे मार्ग में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु लोक परंपराओं का उत्साहपूर्वक निर्वहन करते दिखाई दिए।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं के इंतजाम किए थे। गोलकोंडा किले परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसने पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाली। वहीं, हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड तथा ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (जीएचएमसी) ने पेयजल, स्वच्छता और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को तैनात किया। मैदान में श्रद्धालु पारंपरिक भोजन तैयार कर अपने परिजनों और अन्य भक्तों के साथ साझा करते नजर आए।

उत्सव में शामिल एक महिला श्रद्धालु, जिन्हें स्थानीय परंपरा में ‘जोगिनी’ कहा जाता है, ने बताया कि बोनालु का अर्थ देवी को भोजन की भेंट अर्पित करना है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु विशेष रूप से तैयार किए गए नैवेद्य को सिर पर रखकर मंदिर तक ले जाते हैं और देवी को समर्पित करते हैं। यह परंपरा देवी के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।

एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि देवी को परमानम (दूध और चावल की खीर), पेरुगुअन्नम (दही चावल), आकू कूरु (पत्तेदार सब्जी) तथा पच्ची पुलुसु (इमली से बना पारंपरिक व्यंजन) सहित विभिन्न प्रकार के नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पशु बलि की परंपरा का भी पालन करते हैं और इसे देवी के प्रति श्रद्धा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा का हिस्सा मानते हैं।

तेलंगाना का बोनालु उत्सव राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामुदायिक परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। आगामी एक महीने तक हैदराबाद, सिकंदराबाद और राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित महाकाली मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, शोभायात्राएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।------------

हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj