पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद संघ की पहली समन्वय बैठक, राज्य के सामाजिक समीकरण पर मंथन
नई दिल्ली, 24 सितंबर (हि.स.)।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के बीच गुरुवार को पहली बड़ी समन्वय बैठक में राज्य के सामाजिक समीकरण और सरकार के कामकाज को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। दिल्ली के अशोक रोड स्थित बैठक में संघ ने सरकार को बंगाल की सामाजिक परिस्थितियों को समझते हुए काम करने और समाज के विभिन्न वर्गों तक सरकार की पहुंच मजबूत करने का संदेश दिया।
संघ के सूत्रों के मुताबिक, बैठक में यह जानने पर जोर रहा कि सरकार का प्रभाव समाज के किस वर्ग तक कितना पहुंचा है और किन क्षेत्रों में संगठन को अपना संपर्क और मजबूत करने की जरूरत है। विभिन्न सामाजिक और पेशागत समूहों की अपेक्षाओं को समझने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में युवा और रोजगार, महिलाएं, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं आदिवासी समाज, पिछड़े क्षेत्रों का विकास और विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ लगातार संपर्क बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया गया। संघ का जोर इस बात पर रहा कि सरकार के प्रशासनिक फैसलों के साथ उनके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को भी समझना जरूरी है।
संघ ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी बल दिया। सरकार की योजनाओं और फैसलों का लाभ लोगों तक पहुंचने के साथ-साथ संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं को जनता की समस्याओं, अपेक्षाओं और असंतोष की जानकारी नियमित रूप से सरकार तक पहुंचाने की बात कही गई।
बैठक में प्रशासन और संगठन के समन्वय, आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और राज्य में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। सत्ता में आने के बाद सरकार और संगठन को एक साथ तालमेल के साथ आगे बढ़ाना संघ-भाजपा के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य, केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, भाजपा के अखिल भारतीय संगठन महासचिव बी. एल. संतोष और संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

