home page

गुरुग्राम के ‘द ठेका’ शराब कारोबार पर ईडी की छापेमारी, 11 लाख रुपये नकद जब्त

 | 
गुरुग्राम के ‘द ठेका’ शराब कारोबार पर ईडी की छापेमारी, 11 लाख रुपये नकद जब्त


नई दिल्ली, 04 नवंबर (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुग्राम के शराब कारोबार से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में 10 ठिकानों पर छापेमारी की है। तीन और चार नवंबर को की गई इस कार्रवाई में 11 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं। शराब सिंडिकेट ने बिना होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप वाली एक लाख से अधिक आयातित विदेशी शराब की बोतलें अवैध रूप से खरीदीं और गुरुग्राम में ‘द ठेका’ नाम से संचालित शराब की दुकानों के माध्यम से बेचीं। इस कारोबार से 10 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय होने का अनुमान है।

ईडी के गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत चल रही जांच के सिलसिले में ये तलाशी अभियान चलाया। जांच के दायरे में ‘द ठेका’ के मालिक अंकुश गोयल और अन्य साझेदारों से जुड़े कार्यालय और आवासीय परिसर शामिल थे। इसके अलावा विदेशी शराब आपूर्तिकर्ताओं, बिना होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप के शराब की आपूर्ति में शामिल अनधिकृत लोगों तथा परिवहनकर्ताओं के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई।

ईडी ने हरियाणा पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी और दाखिल आरोपपत्र के आधार पर जांच शुरू की थी। मामला आयातित विदेशी शराब की अवैध बिक्री और बॉन्ड-टू-बॉन्ड हस्तांतरण व्यवस्था के दुरुपयोग से जुड़ा है। इस व्यवस्था के तहत आयातित विदेशी शराब को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करते समय सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क का भुगतान तत्काल नहीं करना होता है।

ईडी के अनुसार, 9 दिसंबर 2025 को आबकारी अधिकारियों ने ‘द ठेका’ से बिना होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप वाली आयातित विदेशी शराब की 3,921 पेटियां और 176 खुली बोतलें बरामद कर जब्त की थीं। इसके अलावा, शराब सिंडिकेट के कुछ सदस्यों के खिलाफ मिलावटी शराब बेचने के आरोप में हरियाणा पुलिस ने एक अन्य प्राथमिकी भी दर्ज की थी।

जांच में सामने आया कि विदेशी शराब भारत में सरकार से मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा आयात की गई थी। सिंडिकेट ने इस शराब को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजने के लिए बॉन्ड-टू-बॉन्ड हस्तांतरण व्यवस्था का दुरुपयोग किया। इसके लिए हरियाणा और गोवा/महाराष्ट्र में अलग-अलग कंपनियां बनाई गईं और जरूरी सीमा शुल्क लाइसेंस तथा दस्तावेज हासिल किए गए।

विदेशी शराब आपूर्तिकर्ता कंपनियों को बैंकिंग माध्यम से भुगतान करने के बाद शराब हरियाणा के बंधुआ गोदामों में स्थानांतरित की गई। हालांकि, इसे गोवा और महाराष्ट्र के निर्धारित गोदामों तक भेजने के बजाय परिवहनकर्ताओं की मिलीभगत से सीधे गुरुग्राम की शराब दुकानों तक पहुंचा दिया गया। वहां इसे वैध आयातित शराब का स्टॉक बताकर बेचा गया। इस तरह सीमा शुल्क, उपकर और अन्य करों की कथित चोरी की गई।

ईडी की जांच के अनुसार, वर्ष 2025-2027 की अवधि के लिए शराब लाइसेंस मिलने के बाद सिंडिकेट ने बिना होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप वाली आयातित विदेशी शराब खरीदकर बेचने की योजना बनाई। जून से नवंबर 2025 के बीच एक लाख से अधिक बोतलें खरीदी गईं। इन्हें बिना निर्धारित सीमा शुल्क, वैट, अन्य करों और परमिट शुल्क का भुगतान किए बेचा गया। एजेंसी के मुताबिक, इस अवैध बिक्री से 20 से 25 प्रतिशत तक मुनाफा कमाया गया और 10 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय पैदा हुई।

तलाशी के दौरान ईडी ने आपत्तिजनक दस्तावेज, आयातित विदेशी शराब की खरीद से संबंधित रिकॉर्ड और बॉन्ड-टू-बॉन्ड व्यवस्था के तहत खरीदी तथा आपूर्ति की गई शराब से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड बरामद कर जब्त किए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर