महादेव सट्टा एप के संचालक सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी ने की कुर्क
रायपुर, 25 मार्च (हि.स.)। महादेव सट्टा एप के संचालक सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ रुपये की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अस्थायी रूप से कुर्क कर ली है। ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने 24 मार्च को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए ) 2002 के तहत यह कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर (छत्तीसगढ़) स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने यह जानकारी बुधवार को दी।
इस ताजा कार्रवाई के साथ महादेव ऐप मामले में अब तक ईडी द्वारा कुर्क या जब्त की गई कुल संपत्ति का मूल्य 4,300 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। ईडी ने अब तक इस मामले के सिलसिले में पूरे देश में 175 से ज्यादा जगहों पर तलाशी अभियान चलाए हैं। इसके अलावा इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 74 लोगों को रायपुर की विशेष अदालत (पीएमएलए) में दायर पांच ‘अभियोजन शिकायतों’ में आरोपित बनाया गया है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपित ने मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए देश और विदेश में कई संपत्तियां खरीदी थीं। इसी के तहत एजेंसी ने दुबई और नई दिल्ली में स्थित करीब 20 प्रॉपर्टी जब्त की हैं, जिनमें 18 संपत्तियां दुबई में, 2 संपत्तियां नई दिल्ली में इनकी कुल अनुमानित बाजार कीमत करीब 1700 करोड़ रुपये हैं। इसमें बुर्ज खलीफा का अपार्टमेंट भी शामिल है।
जांच में ये बात सामने आई है कि सौरभ ने सट्टे के पैसे से ये लग्जरी बंगले कार खरीदे थे। ईडी के मुताबिक अटैच की गई विदेशी संपत्तियां दुबई के प्राइम लोकेशन पर स्थित हैं।
ईडी के अनुसार ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर से जुड़ी हैं, जिन्हें उनके और उनके सहयोगियों के नाम पर कंट्रोल किया जा रहा था। इनमें विकास छपारिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन तिब्रेवाला और सुरेंद्र बागड़ी शामिल हैं। जांच में सामने आया कि, ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक और अन्य अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म से कमाए गए प्रोसीड्स ऑफ क्राइम से खरीदी गई थीं।
जांच में सामने आया है कि हजारों डमी बैंक अकाउंट खोले गए। आम लोगों के आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया। सट्टेबाजी से कमाए गए अवैध पैसे को हवाला नेटवर्क और शेल कंपनियों के जरिए विदेशों में भेजा गया और फिर इसे भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया। फिर यूएइ और भारत में महंगी संपत्तियों में निवेश किया गया।
उल्लेखनीय है कि सौरभ चंद्राकर को अक्टूबर 2024 में दुबई में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात में है, जहां उसके प्रत्यर्पण की कार्यवाही स्थानीय अदालतों में लंबित है। जनवरी 2026 में ईडी ने उसे वापस लाने के लिए एक नया प्रत्यर्पण अनुरोध भी भेजा था। उसका साथी रवि उप्पल भी दुबई में हिरासत में लिया गया था, लेकिन वह बाद में जमानत पर रिहा हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार उप्पल अब वानुअतु भाग गया है, जिसे वापस लाना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि भारत का उस देश के साथ प्रत्यर्पण समझौता नहीं है।
रायपुर की एक विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

