लंदन की सरजमीं पर होम्योपैथी गढ़ेगी नई पहचान, वैश्विक मंच पर भारतीय चिकित्सा का प्रतिनिधित्व करेंगे यूपी के डॉ. राणा प्रताप
- ब्रिटिश संसद में 10 अप्रैल 2026 को आयोजित होगा विश्व होम्योपैथिक अनुसंधान सम्मेलन
लखनऊ, 05 अप्रैल (हि.स.)। सात समंदर पार लंदन की सरजमीं पर होम्योपैथी अपनी नई पहचान गढ़ने जा रही है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के तत्वावधान में ब्रिटिश संसद में 10 अप्रैल 2026 को होने वाले विश्व होम्योपैथिक अनुसंधान सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए डॉ. राणा प्रताप यादव को आमंत्रित किया गया है। यह अवसर चिकित्सा जगत के लिए गौरव का विषय है। उनकी उपलब्धि न सिर्फ एक चिकित्सक का सम्मान है, बल्कि सदियों के संघर्ष, उपेक्षा और विश्वास की वैश्विक स्वीकृति का ऐतिहासिक क्षण है।
उत्तर प्रदेश के जनपद कुशीनगर के कसया क्षेत्र स्थित पांडेय बसडीला ग्राम निवासी चिकित्सक डॉ. राणा प्रताप यादव ने रविवार काे 'हिन्दुस्थान समाचार' से खास बातचीत में कहा कि जब उनके हाथ में ब्रिटिश संसद में हाेने वाले विश्व होम्योपैथिक अनुसंधान सम्मेलन का ‘एंट्री पास’ आया तो वह केवल एक कागज नहीं था, बल्कि उन तमाम सवालों, तानों और संघर्षों का जवाब था, जिनसे हर होम्योपैथ डॉक्टर रोज जूझता है। यह उस विश्वास की जीत है, जो वर्षों तक बंद कमरों में सैमुअल हैनिमैन की तस्वीर के सामने बैठकर साधा गया।
मीठी गोली से जीवन बचाने पर ऑक्सफाेर्ड का सम्मेलन कराना बड़ा संकेत
डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि हर उस डॉक्टर की है, जो सीमित संसाधनों में भी मरीजों की सेवा करता है। आधी रात में भी छोटी सी मीठी गोली से जीवन बचाने वाले लाखों चिकित्सकों के आत्मविश्वास को यह नई उड़ान देगा। यह सम्मान ग्रामीण क्लीनिक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक की यात्रा का प्रतीक बन गया है। उन्हाेंने कहा कि विश्व होम्योपैथिक अनुसंधान सम्मेलन के आयोजन का ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से आयाेजन करना अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वही पश्चिमी दुनिया है जहां कभी होम्योपैथी को कमतर आंका जाता था, लेकिन आज वही संस्थान इसे वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला रहे हैं।
वैश्विक मंच पर भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान का दिखाएंगे दम
डॉ. राणा प्रताप यादव ने चिकित्सा क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, विशेषकर हृदय में छिद्र जैसी जटिल समस्याओं के उपचार में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसके अलावा हृदय रोग, स्व-प्रतिरक्षी रोग और गुर्दे की पथरी के उपचार व अनुसंधान में उनके कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. यादव ने कहा कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटिश संसद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से मिला यह आमंत्रण उनके लिए अत्यंत सम्मान की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि वह इस वैश्विक मंच पर भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान का प्रभावी प्रस्तुतीकरण करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय पहचान... देश-प्रदेश का बढ़ाया मान
उल्लेखनीय है कि डॉ. राणा प्रताप यादव को पूर्व में राज्यपाल की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। वे जर्मनी, दुबई व लंदन सहित कई देशों में अपने शोध कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल कुशीनगर, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
भारत-ब्रिटेन के बीच चिकित्सा और अनुसंधान सहयोग को मिलेगी नई दिशा
उल्लेखनीय है कि डॉ. राणा को यह आमंत्रण ऑक्सफोर्ड यूनिवसिर्टी के मर्टन कॉलेज से संबद्ध वरिष्ठ शिक्षाविद निकिता वेद ने प्रेषित किया है। डॉ. यादव विश्व होम्योपैथिक अनुसंधान सम्मेलन में विशिष्ट प्रतिनिधि के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इससे चिकित्सा जगत में गर्व का माहौल है। सम्मेलन में ब्रिटेन की सांसद शिवानी राजा, उच्च सदन की सदस्या बैरोनेस वर्मा और लॉर्ड सभा के सदस्य लॉर्ड रावल सहित विभिन्न देशों के नीति-निर्माता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह आयोजन भारत और ब्रिटेन के बीच चिकित्सा और अनुसंधान सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
वैश्विक मंच पर उभर रहा भारतीय चिकित्सा नेतृत्व
यह भव्य आयोजन तीन ऐतिहासिक पड़ावों में विभाजित होगा। पहले दिन ब्रिटिश संसद में होम्योपैथी का वैश्विक शंखनाद होगा। दूसरे दिन राष्ट्रीय संग्रहालय लंदन में विरासत और विज्ञान का संगम दिखेगा। तीसरे दिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ज्ञान का महाकुंभ सजेगा।
भारत की चिकित्सा विरासत का ‘रिवर्स इम्पैक्ट’
विशेषज्ञ इसे ‘रिवर्स इम्पैक्ट’ का उदाहरण मान रहे हैं। जहां कभी नीतियां पश्चिम से भारत आती थीं, अब भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति उसी धरती पर अपनी प्रज्ञा का लोहा मनवाने जा रही है। यह आयोजन भारत की सॉफ्ट पावर और चिकित्सा कूटनीति को भी नई धार देगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश

