आरडीआई फंड में पैसे के गलत इस्तेमाल और हितों के टकराव को रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैंः डॉ. जितेन्द्र सिंह
नई दिल्ली, 19 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड में पैसे के गलत इस्तेमाल और हितों के टकराव को रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। इन नियमों का मकसद सरकारी यानी करदाताओं के पैसे और निजी निवेश, दोनों की सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा कि अगर किसी हितधारक के पास बेहतर सुरक्षा उपायों को लेकर सुझाव हैं, तो सरकार उनका स्वागत करेगी।
बुधवार को
विज्ञान मंत्रालयों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आरडीआई फंड के तहत चुनी गई कुछ कंपनियों को पैसा जारी कर दिया गया है। बाकी कंपनियों को भी जल्द पैसा जारी किया जाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अधिकारियों से कहा कि जांच और जरूरी प्रक्रियाओं में कोई कमी नहीं होनी चाहिए, लेकिन फंड जारी करने में अनावश्यक देरी भी नहीं होनी चाहिए।
दो हफ्ते में नए फंड मैनेजर
बैठक में बताया गया कि नए फंड मैनेजर की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और इसे करीब दो सप्ताह में पूरा करने की उम्मीद है। ये फंड मैनेजर योग्य कंपनियों की पहचान करने और उन्हें आरडीआई फंड के तहत निवेश दिलाने में मदद करेंगे।
सरकार आरडीआई फंड में शामिल तकनीकी क्षेत्रों का दायरा भी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अलग-अलग मंत्रालयों से सुझाव लिए गए हैं, ताकि एआई समेत नई और रणनीतिक तकनीकों को भी जरूरत के मुताबिक फंड से मदद मिल सके।
आरडीआई
फंड में करीब 50 फीसदी निवेश निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है। इसलिए सरकार का कहना है कि सरकारी और निजी, दोनों तरह के पैसे की सुरक्षा जरूरी है।
बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया, छोटे वीडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा अक्टूबर में होने वाले ईएसटीआईसी 2026 और सितंबर में होने वाले स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

