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देश की बायोइकोनॉमी को अगले चार सालों में 300 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह

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देश की बायोइकोनॉमी को अगले चार सालों में 300 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह


नई दिल्ली, 15 जून (हि.स.)।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने बताया कि देश की बायोइकोनॉमी 2014 में 10 अरब डॉलर से बढ़कर 190 अरब डॉलर से अधिक हो गई है और 2030 तक इसे 300 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

सोमवार को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) हेडक्वार्टर में विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में बदलाव लाने वाली तरक्की के 12 साल विषय पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी प्रयोगशालाओं से निकलकर आम नागरिकों के जीवन का हिस्सा बन गए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा का मुख्य आधार बन गए हैं।

इस पत्रकार वार्ता में सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी, बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले मौजूद रहे। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है। जहां पहले गिने-चुने स्पेस स्टार्टअप थे, वहीं अब उनकी संख्या 400 से अधिक हो गई है। भारत की स्पेस इकोनॉमी, जो वर्तमान में लगभग 8 अरब डॉलर की है, आने वाले वर्षों में 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता को भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल लैंडिंग करने वाला पहला देश बना।

डॉ. सिंह ने कहा कि 2014 में देश में केवल 17 मौसम रडार थे, जबकि अब उनकी संख्या लगभग 50 हो चुकी है और 50 नए रडार लगाने की योजना है। मौसम पूर्वानुमान सेवाएं 300 शहरों से बढ़कर करीब 1,700 स्थानों तक पहुंच गई हैं, जिससे किसानों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को काफी मदद मिल रही है।

जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियां

गिनवाते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत ने सस्ती सीएआर-टी सेल थेरेपी, जीनोमिक्स, प्रिसिजन मेडिसिन और नई पीढ़ी की एंटीबायोटिक्स जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। देश अब केवल अपनी जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान भी विकसित कर रहा है।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद्(सीएसआईआर)द्वारा विकसित तकनीकों का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में किया जा रहा है। अरोमा मिशन का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इससे विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों के किसानों को नई आजीविका के अवसर मिले हैं।

भविष्य के लक्ष्य

भारत ने 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य रखा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी आज भारत के विकास की प्रमुख शक्ति बन चुके हैं और देश को “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी