छात्रों ने सौंपी पर्यावरण मंत्री को दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ वायु को बढ़ावा देने संबंधी रिपोर्ट
नई दिल्ली, 09 सितंबर (हि.स.)। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय तथा उसके दिल्ली केंद्र के विभिन्न विषयों से जुड़े छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपने शैक्षणिक अधिकारियों के साथ दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से बुधवार को मुलाकात की। इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण एवं वन विभाग के सचिव विजय कुमार बिधूड़ी भी उपस्थित रहे।
छात्रों ने प्रोमोटिंग क्लीन एयर इन दिल्ली एनसीआर (दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ वायु को बढ़ावा देना) शीर्षक से एक अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें क्षेत्र में वायु प्रदूषण की चुनौती का विश्लेषण करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम व्यवस्थाओं के आधार पर कई उपाय सुझाए गए हैं।
अध्ययन में रेखांकित किया गया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण मूल रूप से पूरे एयरशेड (वायुमंडलीय क्षेत्र) से जुड़ी चुनौती है, क्योंकि प्रदूषण के स्रोत राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। इसमें समन्वित कार्रवाई, बेहतर निगरानी, स्रोत-विशिष्ट उपायों और पूर्वानुमान आधारित क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया, जिसमें पूरे एनसीआर में समन्वय शामिल हो।
छात्रों का स्वागत करते हुए और उनके अध्ययन की सराहना करते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान और सतत भविष्य के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “नई पीढ़ी के पास नए विचार, नई ऊर्जा और पारंपरिक सोच को नया रूप देने का साहस है। दिल्ली की पर्यावरणीय चुनौतियां जटिल और व्यापक हैं, लेकिन नवाचार, प्रौद्योगिकी और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से इनका समाधान किया जा सकता है। हम युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के साथ जुड़ना चाहते हैं, क्योंकि उनके विचार हमें ऐसे समाधान तलाशने में मदद कर सकते हैं, जो व्यावहारिक होने के साथ-साथ परिवर्तनकारी भी हों।”
मंत्री ने दिल्ली के सामने मौजूद विशाल अपशिष्ट प्रबंधन चुनौती को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 13,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जो न्यूजीलैंड में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे से भी अधिक है। इसके अतिरिक्त दिल्ली में लगभग 30,000 से 35,000 मीट्रिक टन पुराने कचरे का भी प्रसंस्करण किया जा रहा है। इस प्रकार प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे और वर्षों से जमा पुराने कचरे—दोनों के प्रबंधन का दायित्व सरकार के सामने है, जो इस चुनौती के विशाल स्तर को दर्शाता है।
मंत्री ने कहा, “दिल्ली को केवल आज उत्पन्न होने वाले कचरे का ही प्रबंधन नहीं करना है, बल्कि वर्षों से जमा पुराने कचरे की समस्या का भी समाधान करना है। इसका पैमाना बहुत बड़ा है, लेकिन हमारा दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वाकांक्षी है। हम वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, अधिक से अधिक संसाधन पुनर्प्राप्ति और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, ताकि कचरे को केवल समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक संसाधन के रूप में देखा जा सके।”
साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा प्रस्तुत अध्ययन में वैश्विक अनुभवों के आधार पर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। इनमें परिवहन के लिए उत्सर्जन-आधारित नियमन, ईंट भट्ठों के प्रदर्शन मानकों में सुधार, पराली को आर्थिक मूल्य प्रदान करना, मौजूदा अनौपचारिक नेटवर्क के माध्यम से रीसाइक्लिंग को औपचारिक रूप देना, खाना पकाने के लिए प्रदूषण रहित साधनों को बढ़ावा देना तथा पूर्वानुमान आधारित एयरशेड प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना शामिल हैं।
अध्ययन में इस बात पर जोर दिया गया कि दिल्ली के वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान अलग-अलग और बिखरे हुए उपायों के माध्यम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक एकीकृत, सार्वजनिक रूप से सुलभ और पूर्वानुमान आधारित एयरशेड प्रणाली की आवश्यकता है, जिसमें सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़े, जमीनी स्तर की निगरानी, मौसम संबंधी पूर्वानुमान और प्रदूषण के स्रोतों का वैज्ञानिक विश्लेषण शामिल हो तथा पूरे एनसीआर में समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं की ओर से प्राप्त रचनात्मक सुझावों और शोध का स्वागत करती है तथा इस प्रकार के संवाद और सहयोग को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

