दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट हड़ताल से दूसरे दिन भी फल-सब्जी की सप्लाई पर असर संभव
नई दिल्ली, 21 मई (हि.स)। दिल्ली-एनसीआर में माल परिवहन संचालकों की तीन-दिवसीय हड़ताल ने राजधानी में फल, सब्जियों, दूध और अन्य जरूरी चीजों की आपूर्ति में संभावित रुकावट को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के नेतृत्व में तीन दिवसीय “चक्का जाम” को हड़ताल के पहले दिन भारी समर्थन मिला है। दिल्ली सरकार के साथ गुरुवार को हुई बैठक में कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। ऐसे में इसका दूसरे दिन भी असर दिख सकता है।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सबरवाल ने कहा कि हड़ताल का पालन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर में टीमें तैनात की गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली सरकार और सीएक्यूएम की अन्यायपूर्ण एवं परिवहन विरोधी नीतियों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में चल रही 3 दिवसीय परिवहन हड़ताल के पहले दिन ट्रांसपोर्टरों, ट्रक ऑपरेटरों, ड्राइवरों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े हुए सभी वर्गों का भारी समर्थन मिला है।
डॉ. हरीश सबरवाल ने बताया कि आज दिल्ली सरकार के खाद्य, आपूर्ति एवं पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा बैठक बुलाई गई थी, इस बैठक से हमें उम्मीद थी कि परिवहन बिरादरी द्वारा उठाए गए उन सभी मुद्दों, जिसमें विशेष रूप से कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) के निर्देशों और अन्य संबंधित समस्याओं का कोई सकारात्मक हल निकलेगा। लेकिन, इस बैठक में उनके मंत्रालय और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के नेतृत्व में दिल्ली-एनसीआर की विभिन्न परिवहन संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया और माननीय मंत्री को परिवहन क्षेत्र की गंभीर समस्याओं और परेशानियों से अवगत कराया। मंत्री ने सभी बातों को गंभीरता और धैर्यपूर्वक सुना तथा माना कि परिवहन बिरादरी की मांगें और समस्याएं वास्तविक एवं जायज हैं। हालांकि, बैठक में किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है। मंत्री ने कहा कि सरकार परिवहन बिरादरी के साथ है, लेकिन कुछ मामलों में राहत के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ेगा।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के आह्वान पर लगभग 68 ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों ने दिल्ली सरकार के कमर्शियल वाहनों पर ग्रीन टैक्स (पर्यावरण मुआवजा उपकर) बढ़ाये जाने के खिलाफ हड़ताल की शुरुआत की है। परिवहन ठप होने का यह सिलसिला 22 और 23 मई को जारी रहने वाला है। ट्रांसपोर्टरों ने विरोध-प्रदर्शन के तहत, दिल्ली में प्रवेश करने वाले मालवाहक वाहनों ने अपना परिचालन रोक दिया है।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस वर्ष 1936 से देश के सड़क परिवहन क्षेत्र के माल एवं यात्री परिवहन से जुड़े हितों की रक्षा करने वाला सर्वोच्च संगठन है। ये पूरे भारत में लगभग 95 लाख ट्रक ऑपरेटरों, लगभग 26 लाख ड्राइवरों, बस, टैक्सी एवं मैक्सी-कैब ऑपरेटरों तथा 3500 से अधिक तहसील, जिला एवं राज्य स्तरीय परिवहन संगठनों, यूनियनों और फेडरेशनों का प्रतिनिधित्व करता है।
उल्लेखनीय है कि सामान्य दिनों में लगभग 70,000 ट्रक विभिन्न प्रदेश सीमाओं से प्रतिदिन दिल्ली में प्रवेश करते हैं, लेकिन आज विरोध प्रदर्शन के दौरान केवल लगभग 100-200 ट्रक ही दिल्ली में प्रवेश कर पाए, जिनमें से अधिकांश पहले से रास्ते में थे या हड़ताल शुरू होने से पहले चल चुके थे। यह इस आंदोलन की बड़ी सफलता और परिवहन बिरादरी में अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ भारी रोष को दर्शाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

