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'ज्ञान वही जो भयमुक्त करे, कायरता से मुक्ति ही अखंड भारत का मार्ग': इंद्रेश कुमार

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'ज्ञान वही जो भयमुक्त करे, कायरता से मुक्ति ही अखंड भारत का मार्ग': इंद्रेश कुमार


नई दिल्ली, 13 मई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने बुधवार को कहा कि ज्ञान वही है, जो मनुष्य को निडर बनाए, यदि ज्ञान भयमुक्त नहीं कर सकता तो वह व्यर्थ है।

इंद्रेश कुमार ने यह बात दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में 'शारदा पीठ' पुस्तक लोकार्पण के दौरान कही। इसका प्रकाशन सुरुचि प्रकाशन ने किया। इस पुस्तक के लेखक ख्वाजा फारूक रेंज़ूशाह और प्रो. गीता सिंह हैं। उन्होंने कहा, ज्ञान वही जो भयमुक्त करे, कायरता से मुक्ति ही अखंड भारत का मार्ग है।

1997 के दौर को याद करते हुए इंद्रेश कुमार ने बताया कि उस समय वे जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के प्रचारक थे। उन्होंने आतंकियों से अपनी एक मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, मैंने आतंकवाद से हाथ मिलाते हुए उसे बहुत करीब से देखा है। उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा और हरकत-उल-अंसार जैसे संगठनों के मुख्य लोगों से हुई बातचीत का खुलासा किया।

उन्होंने बताया कि जब वे आतंकियों से मिले, तो उनके पास हथियार (बंदूकें) थे। इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने उनसे पूछा, क्या आप इन खिलौनों से बहुत प्यार करते हैं? क्या ये खिलौने खुदाई (ईश्वरीय) हैं या शैतानी? क्योंकि इन खिलौनों ने किसी को मुस्कुराहट नहीं दी, सिर्फ मौत और डर दिया है।

इंद्रेश कुमार ने 'शारदा पीठ' (जो वर्तमान में पाक अधिकृत कश्मीर में है) की मुक्ति पर जोर देते हुए कहा कि 1997 में पहली बार 'जय शारदे, जय भारत' का नारा गूंजा था। उन्होंने कहा कि हमें कायरता के दौर से मुक्त होना होगा। जिस दिन हम कायरता छोड़ देंगे, गुलामी खुद-ब-खुद चली जाएगी। उन्होंने संकल्प दोहराया कि शारदा पीठ को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराना ही होगा।

अमृतसर की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उनसे 'खालिस्तान' के बारे में सवाल किया था। इस पर उन्होंने बहुत ही चतुराई और स्पष्टता से जवाब दिया, सारा हिंदुस्तान ही खालिस्तान है और सारा खालिस्तान ही हिंदुस्तान है। उन्होंने कहा कि ज्ञान में अगर सत्य हो, तो वह किसी भी अलगाववादी सोच की जड़ें हिला सकता है।

महाभारत के प्रसंगों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संपत्ति और सीमाएं बांटने से शांति नहीं आती। कर्ण और बख्तियार खिलजी की घटनाओं के जरिए 'मुक्ति' और 'कर्मफल' के सिद्धांत को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जो अधर्म का साथ देते हैं, उन्हें उनके कर्मों का फल उसी स्थान पर मिलता है, जैसा कर्ण के साथ हुआ।

स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज (पूज्य शारदा पीठाधीश्वर) ने कहा कि वर्तमान में जिसे लोग 'ज्ञान' समझ रहे हैं, वह वास्तव में केवल 'एजुकेशन' (शिक्षा) है। उन्होंने गीता के श्लोकों का संदर्भ देते हुए कहा कि वास्तविक ज्ञान वह है, जिसे जानने के बाद कुछ भी जानना शेष न रह जाए। ज्ञान वह अनंत चिंतन है जो सूक्ष्मीकृत होकर गूँथ जाता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है।

सनातन धर्म पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म न तो पुरातन है और न ही नूतन। जो नया है वह कल पुराना होगा, लेकिन सनातन त्रिकाल बाधित और सत्य है।

बिहार के पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि इस किताब के माध्यम से हम भारतीय आदर्शों और मूल्यों को समझ सकें। ध्यान रखिएगा एक विचार होता है, एक आचार होता है। अगर विचार के अनुसार आचार नहीं होगा तो आपके पास विचार करने की क्षमता नहीं रहती। तभी क्षमता आती है जब आप अपनी बात को दूसरों तक पहुंचा सकें, जब आपका अपना आचरण उसके अनुसार हो। मुझे विश्वास है कि हमारी ये किताब हमारे अंदर वो भावना पैदा करने में कामयाब होगी।

यह पुस्तक 'शारदा पीठ' के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालती है, जिसे विश्व का प्रथम ज्ञान विश्वविद्यालय कहा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी