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वैचारिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन ही जनजातीय समाज का मूल आधार : दुर्गा दास उइके

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वैचारिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन ही जनजातीय समाज का मूल आधार : दुर्गा दास उइके


नई दिल्ली, 19 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने शनिवार को कहा कि भारत भौतिक प्रगति के साथ-साथ वैचारिक और संवेदनाओं के उत्कृष्ट स्तर को लेकर चलने वाला देश है और यही जनजातीय समाज की मूल आत्मा भी है।

मंत्री दुर्गा दास आज दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में आयोजित ‘सांस्कृतिक समागम विशेषांक’ के लोकार्पण को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन केन्द्रीय वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली और वनबन्धु मीडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।

उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता के बिना यह स्वर्णिम काल संभव नहीं है। इसके अलावा, आज हमारे चिंतकों, विचारकों और साधकों के बीच एक महत्वपूर्ण विषय सामने आया है कि जनजाति समाज को केवल बाहरी दृष्टि से देखकर कभी नहीं समझा जा सकता। भारत भूमि की यह विशेषता रही है कि यहां भौतिक उन्नति के साथ-साथ वैचारिक और आत्मिक प्रगति का अद्भुत समन्वय रहा है। हमारा मन शुद्ध हो, हमारी भाव-संवेदनाएं उत्कृष्ट हों और दूसरों की पीड़ा को महसूस करने की क्षमता सदा जीवंत रहे यही एकात्म चिंतन हमारी शक्ति है। इसी समग्र दृष्टि को लेकर वनवासी कल्याण आश्रम और हमारे सभी सहयोगी संगठन निरंतर द्रुत गति से आगे बढ़ रहे हैं।

उस दौर की नीतियों और एजेंसियों को भूमि आवंटन जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वनवासी कल्याण आश्रम जैसी मातृ संस्था न होती, तो आज देश और जनजातीय समाज का चित्र अत्यंत भयावह होता।

अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री भगवान सहाय ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम “तू मैं एक रक्त” और “नगर, ग्राम, वनवासी, हम सब भारतवासी” के भाव के साथ जनजातीय समाज में सामाजिक समरसता और सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि धर्मांतरण कर चुके अनुसूचित जनजाति (एसटी) के व्यक्तियों का एसटी का दर्जा समाप्त होना चाहिए और इस दिशा में आवश्यक नीतिगत कदम उठाए जाने चाहिए।

आईजीएनसीए के सदस्य-सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि दिल्ली में जब सांस्कृतिक समागम आयोजित हुआ था वो ऐतिहासिक और अभूतपूर्व रहा। उस दौरान देशभर से जुटे जनजातीय समाज ने जिस अनुशासन और भव्यता की मिसाल पेश की, उसकी गूँज भारत के साथ-साथ विदेशों तक पहुँची, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके, आईजीएनसीए के सदस्य-सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री भगवान सहाय,दिल्ली प्रांत के सेवा प्रमुख रविकांत, भारतीय मजदूर संघ के कोषाध्यक्ष उमेद सिंह नेगी, पूर्व वीएचपी प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम प्रांत से प्रमोद पेटकर, प्रचार आयाम प्रमुख धनीराम, उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सुरेश कुलकर्णी, आयोजक मंडल की ओर से वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सुशील बाहेती, महासचिव अजीत शुक्ला तथा कार्यक्रम संयोजक एवं वनबन्धु मीडिया फाउंडेशन के निदेशक विनोद अग्रवाल सहित अन्य अतिथिगण उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी