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सिनेमा को शांति और करुणा का संचार करना चाहिए: अडूर गोपालकृष्णन

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सिनेमा को शांति और करुणा का संचार करना चाहिए: अडूर गोपालकृष्णन


नई दिल्ली, 04 मई (हि.स.)। फिल्म निर्देशक एवं दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अडूर गोपालकृष्णन ने सोमवार को कहा कि सिनेमा का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति और करुणा का संचार करना होना चाहिए।

गोपालकृष्णन ने दिल्ली स्थित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में आयोजित 15वें ‘दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (डीआईएफएफ) 2026’ उद्घाटन के दौरान यह बात कही। उद्घाटन फिल्म ‘हर स्टोरी’ से किया गया। इसके निर्देशक चीन के शाओ यिहुई हैं। इस महोत्सव का उद्देश्य वैश्विक सिनेमा, कला और साहित्य की विविध अभिव्यक्तियों को एक मंच पर लाना है। इसमें विश्वभर की सांस्कृतिक धाराओं का संगम देखने को मिलेगा।

मुख्य अतिथि के रूप में गोपालकृष्णन ने कहा, आयोजन केवल एक फिल्म महोत्सव नहीं बल्कि प्रेम और मित्रता का उत्सव भी है। मित्रता, पारस्परिक सम्मान और स्नेह का अद्भुत अवसर है।

इस मौके पर 'मीनार-ए-दिल्ली’ पुरस्कार प्राप्त करते हुए रूना लैला ने कहा कि संगीत सभी सीमाओं को पार कर मानव आत्मा का विभिन्न रूपों में उपचार प्रदान करता है और यह जाति, पंथ या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता।

उषा उत्थुप ने कहा कि दर्शकों के प्रेम और समर्थन के बिना उनकी 57 वर्षों की संगीत यात्रा निरर्थक होती।

पांच दिन के इस महोत्सव के दौरान आईजीएनसीए द्वारा निर्मित विशिष्ट फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा, साथ ही विभिन्न विषयों पर पैनल चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा।

इस वर्ष के महोत्सव में चीन, रूस और अफ्रीका को फोकस देश के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जो वैश्विक सिनेमा के विविध आयामों और सांस्कृतिक संवाद को दर्शाता है। मुख्यधारा के सिनेमा के साथ-साथ महोत्सव में डॉक्यूमेंट्री और सांस्कृतिक फिल्मों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो विरासत, परम्पराओं और ज्ञान परम्पराओं के दस्तावेज़ीकरण के साथ-साथ भारत की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह, गायिका उषा उत्थुप, बांग्लादेश की गायिका रूना लैला, चित्रकार जतिन दास तथा आईजीएनसीए के अध्यक्ष ‘पद्म भूषण’ राम बहादुर राय सहित अन्य अतिथिगण मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी